अध्याय-2 : मध्ययुग में भारत के व्यापारिक सम्बन्ध अथवा इस्लाम का उदय और पश्चिमी यूरोप का विस्तार - Page 53

38 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

कार्यकलापों में आड़े आने वाली सबसे बड़ी बाधा ईसाइयों की सूदखोरी की नीति थी। एक ही झटके में लोगों पर ब्याज का ऋण देने की पाबन्दी लगा दी गई। धन की कमी और सूदखोरी पर रोक लगने से व्यापार कम होना स्वाभाविक था। चूँकि यहूदी ईसाई धर्म की परिधि में नहीं थे, वे मुद्रा का लेन-देन कर सके और इस कारण आर्थिक विकास में उनका काफी योगदान रहा। यूरोप के आर्थिक विकास में इन बदकिस्मत लोगों की काफी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही किन्तु इनके साथ ईसाइयों ने बहुत बुरा व्यवहार किया। ईसाइयों ने उन्हें ईसा को मौत की सजा देने का अपराधी ठहराया। ख्2, इन चीजों के अतिरिक्त इन पर मनमाने ढंग से कष्टप्रद परिवहन शुल्क लगा दिया गया। उस समय भूगोल की बहुत कम जानकारी थी। समुद्र के खतरे भी किसी तरह कम नहीं थे और समुद्री डाकू लगातार भय बने हुए थे। सबसे बड़ी रुकावट यह थी कि रोम की सड़कें बहुत खराब थीं। प्रतिकूल परिस्थितियों में रोम साम्राज्य के पतन के पश्चात् पश्चिम यूरोप में लम्बी अवधि तक सन्नाटा छाया रहा और जीवन नीरस हो गया, तो इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है।

किस्तुनतुनिया ने व्यापार की ओर अधिक ध्यान नहीं दिया। उसकी नीति खसोटने की थी। बोसफोरस पर स्थित होने के कारण इसे जो लाभ हो सकते थे, उन्हें पूरी तरह प्राप्त करने की ओर इसने कभी ध्यान नहीं दिया। पश्चिम और किस्तुनतुनिया के बीच बहुत कम व्यापार होता था। केवल सैनिक कार्यवाही से ही व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलता था। .... बल्कि सीरिया तथा मिस्र में अरबी शासक वाइजैन्टाइन साम्राज्य के समकालीन शासकों की तुलना में अधिक प्रबुद्ध थे।

किन्तु इस पतन के बावजूद इटली ने मध्य युग के व्यापार तथा विद्वता को सुरक्षित रखा। नौवीं शताब्दी में इटली के उत्तर पूर्व तथा दक्षिण पश्चिम में वास्तव में व्यापारिक गतिविधियों में विकास हुआ। यह इटली में गणतंत्र के प्रादुर्भाव का युग था और पूर्व के साथ व्यापार के काफी सम्पन्न दायित्व थे। पूर्व के साथ व्यापार से प्रत्येक नगर राज्य को काफी लाभ हुआ।

इनमें प्रथम तथा सबसे आगे अमाल्फी है। 820 ई. तक यह पूर्वी साम्राज्य से स्वतन्त्र हो गया। इसकी समुद्री गतिविधियाँ इतनी तेजी से बढ़ीं कि 20 वर्षों के भीतर इसकी नौसेना अरबों द्वारा रोम पर समुद्री आक्रमण होने पर उनके साथ लड़ाई कर सकी थी। उसके कारखाने पालरमो, सियराकुस, मैसीना, डुराज्जू और किस्तुनतुनिया तक में थे और एक व्यापारिक राज्य के रूप में उसकी ख्याति इतनी फैली कि फ्टबूला अमलफितता के समुद्री कानून अन्तर्देशीय समुद्र के किनारे के व्यापारियों में प्रचलित थे और गणतन्त्र की सिक्का पद्धति लैटिन यूरोप तथा लेवौट के मध्य लेन-देन का मुख्य माध्यम थी।य् ख्1, पर

  1. रेमंड ब्रीजले, ‘दी डान ऑफ माडर्न ज्याग्राफी’ खंड-2