40 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
मिस्र, टनिस, फ्राँस और स्पेन के दक्षिणी तट पर स्थित कस्बों तक फैल गया था।
पीसा का प्रादुर्भाव जो जेनोवों जैसा प्रतीत होता है, 1085 ई. में हुआ। हथियारों के बल पर पीसा मुसलमानों तथा वाइजेन्टाइन साम्राज्य से व्यापारिक विशेषाधिकार प्राप्त करने में सफल हुआ। इसका व्यापार इतना अधिक था कि फ्पश्चिम के रूढि़वादी लोग उस समुद्री शक्ति तथा नगर में लोगों की भीड़ को देखकर चकित हो गये। गैर ईसाई तुर्की, लिबयाई, पार्थी चालडियाई ने नगर को गन्दा कर दिया था और इसकी दीवारें काली कर दी थीं। यहाँ व्यापार ही व्यापार था और भाषा जैसी सभी लातीनी बाधाओं को तोड़ कर सभी दिशाओं में फैल गया था। ख्1, पीसा को जितनी रियायतें तथा विशेषाधिकार सुविधाएँ प्राप्त थीं उतनी किसी भी गणतन्त्र को प्राप्त नहीं थीं। इसकी समुद्री गतिविधियाँ यद्यपि थोड़ी थीं, परन्तु प्रभावशाली थीं। इन गणतन्त्रों की व्यापारिक गतिविधियाँ जब प्रारंभिक चरण में थीं तो क्रूस युद्धों से इसे काफी प्रोत्साहन मिला। हमारा क्रूस युद्धों के फौजी पहलू से कोई सरोकार नहीं है, यद्यपि उस समय इन्होंने ही सबसे अधिक शोषण किया। हम अपना ध्यान क्रूस युद्ध के व्यापारिक पहलू तक केन्द्रित रखना चाहते हैं।
समुद्र के अपने खतरे तथा भय थे। ख्2, कठिनाई से कोई अवसर लेने का प्रयास करता था। फ्यह कहना सही होगा कि उस युग में मैदान का रहने वाला कोई व्यक्ति समुद्र में नहीं जाता था, जब तक कि वह ऐसा करने के लिए विवश न हो जाये। क्योंकि समुद्री यात्रा जेल में होने के समान तो थी ही, इस में डूब जाने का खतरा भी रहता था।य् ख्3, तथापि जलमार्ग से माल लाने ले जाने के महत्त्व का मुजाहिदों को तब पता चला जब पहले ईसाई धर्मयुद्ध (1096-99) में थलमार्गों के इस्तेमाल करने से उन्हें काफी थकान हुई। उस समय समुद्री यातायात इटली के गणतन्त्रों के हाथ में था। अतः धर्मयोद्धा इन गणतन्त्रों से अधिकाधिक माँग करने लगे, जो बढ़ते व्यापार के कारण अधिकाधिक सम्पन्न होते जा रहे थे।
ईसाइत की सेवा करते हुए ये गणतन्त्र अपनी भी सेवा करते थे। उन्होंने अपना व्यापार कई गुणा बढ़ा लिया। उनका आयात निर्यात बहुत बढ़ गया। सबसे बड़ी बात यह है कि उन्हें लेवंट के तटों पर विशेष अधिकार प्राप्त हो गये और एक प्रकार से अधिक राजनैतिक प्रतिष्ठा। ज्यों-ज्यों समय बीतता गया वे धर्मयुद्ध में भाग लेने वाले राजकुमारों के अपरिहार्य बन गये, मुख्य सत्ताधारी होने के नाते जब तक धर्म युद्ध का भार उन पर था और वे अपनी बात मनवा सकते थे। ख्4,
ऐसा प्रतीत होता है कि धर्मयुद्ध को अलग-अलग नजरों से देखा जाता था। कैथोलिक
वही, पृष्ठ 427-428
‘नेमेसिस ऑफ नेशन्स’, पृष्ठ 219-220
ब्रेसली खंड-2 पृष्ठ 407
वही, खंड-2, पृष्ठ 407