अध्याय-2 : मध्ययुग में भारत के व्यापारिक सम्बन्ध अथवा इस्लाम का उदय और पश्चिमी यूरोप का विस्तार - Page 59

44 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

के रास्ते कैस्पियन सागर तक जाता था। यह जो प्राचीन मार्ग था, वीनस तथा जेनोवा ने अपना लिया। कैस्पियन से यह मुख्यतः वोल्गा की दिशा में जरिजन नामक स्थान पर जाता था। वहाँ से डोन जाता था, जहाँ अब यना कस्बे में नदी के मुहाने अजीर है। दोनों वीनस आदि जेनोवा को व्यापारिक विशेषाधिकार प्राप्त थे। वीनस में बारहवीं शताब्दी के अंत में एक काउंसल नियुक्त किया गया। उसके पश्चात जेनोवा के लिए एक महत्त्वपूर्ण ऐंटारपोट थ्योडोसिया था जो अब क्रीमिया है। ख्1, इस्लाम ने ईसाइयत को चारों ओर से घेर लिया था। पूर्व और दक्षिण में मुसलमानों ने रूस को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बाधा खड़ी कर दी थी। ख्2, लेकिन मुसलमानों और क्रूस की इस लड़ाई से व्यापार मार्गों में रुकावटों से मात्र भूमध्य गणतन्त्रों को ही नुकसान नहीं हुआ। पहले जेनोवा और वीनस को धक्का लगा, लेकिन इसने यूरोप की समस्त व्यापार प्रणाली को हिला दिया। मुख्य मार्ग जिसके द्वारा एशिया का उत्पादन ईसाइयों के मध्य और उत्तरी राष्ट्रों तक पहुँचता था, वह हैनसियोटिक लीग थी। ख्3, हैनिसियेटिक का मुख्य रूप से इस कारण लाभ हुआ कि इटली गणराज्यों के माध्यम से आने वाले प्राच्य माल पर इसका नियन्त्रण था। बहुत प्राचीन काल से जर्मनी तथा इटली के ऊपर के स्थान, पूर्व के उत्पादों के लिए वीनस गणराज्य पर आश्रित थे और जब 1017 ई. में मसालों से लदे हुए जहाज क्षतिग्रस्त हो गये तो इतिहासकारों ने इसे गम्भीर दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया। ख्4, इस हैनिसयेटिक व्यापार में भारतीय व्यापार का महत्त्वपूर्ण सहयोग रहा। जब पूर्व से माल आना बन्द होने लगा, तो यूरोप के बाजार कमजोर होने लगे। ख्5, इस प्रकार प्राचीन व्यापार मार्गों के बन्द होने से पश्चिमी यूरोप का विस्तार हुआ। सम्पूर्ण स्थिति के बारे में प्रो. ए.एफ. पोलैंड ने संक्षिप्त ब्यौरा दिया है। यह पूछे जाने पर कि अमरीका की 15वीं शताब्दी के अन्त में क्यों

खोज की गयी, उनका यह कहना विरोधाभास होगा कि कोलम्बस ने 1492 में अथवा इसके आसपास अफ्रीका की खोज की, क्योंकि तुर्की रुकावट डालने वाले व्यक्ति है। यह सम्बन्ध बिल्कुल स्पष्ट नहीं है, लेकिन स्पष्ट सम्बन्ध सदैव बाहरी या छिछले होते हैं और यह अधिक गूढ़ हैं। जर्मन में एक कहावत है जिसका अर्थ है मनुष्य वह है जो वह

खाता है। यह उनके लिए ‘आदर्श वाक्य’’ हो सकता है।

(किन्तु यह अधूरा प्रतीत होता है।-सं.)

  1. जे. आफ एम., ओ. एस.

  2. डब्ल्यू.एम. कनिंघम, ‘वेस्टर्न सिविलाजेशन’ (माडर्न टाइम्स), पृष्ठ 130

  3. डब्ल्यू.डब्ल्यू. हंटर, ‘ए हिस्ट्री ऑफ ब्रिटिश इंडिया’, खंड 1, पृष्ठ 52

  4. ब्रेसली, खंड 2, पृष्ठ 405

  5. डब्ल्यू.डब्ल्यू. हंटर, वही, खंड 1, पृष्ठ 53