46 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
था। न्याय करने वाले ही अन्यायी बन गये थे। मजिस्ट्रेट जिनसे सही न्याय देने की अपेक्षा की जाती थी सबसे बड़े प्रजापीड़क थे और वे साधारण चोरों और डाकुओं से बड़े लुटेरे थे। महान पुरुषों में सही या गलत तरीकों से धुन कमाने की धनु सवार थी व्यभिचार इतना अधिक था कि स्कॉटलैंड की राजकुमारी को अपने आप को बलात्कार से बचाने के लिए धार्मिक वस्त्र पहनने पड़ते थे।
प्रायः यह कहा जाता है कि मुसलमानों ने बहुत जुल्म किए, लेकिन जेरूसलम की विजय के समय धर्म योद्धाओं ने भी कोई कम जुल्म नहीं किये। 40,000 सैनिकों को किसी बात का लिहाज रखे बिना तलवार से मौत के घाट उतार दिया गया, हथियार बहादुरों की रक्षा न कर सके, और न ही भीरु आत्मसमर्पण करने से बच सके, बच्चे या बूढ़े अथवा स्त्री या पुरुष किसी पर दया नहीं की गयी। बच्चों को उसी तलवार से काटा गया जिससे उनकी माताओं को काटा गया। जेरूसलम की गलियों में शवों के ढेर लग गये और पीड़ा तथा निराशा की चीत्कार सभी घरों में होने लगी। अब यदि हम भारत तथा इंग्लैंड का इतिहास पढ़ें और समकालीन घटनाओं की तुलना करें तो हमें प्रत्येक हिंदुस्नानी पोलैंड की तरह इंग्लैंड में ओलीवर मिल जाएगा, अतः हमें, भारत के इंगलिश इतिहासकारों को, सर थामस मुनरो द्वारा दी गयी चेतावनी को दुहराना चाहिए। उसने कहा था जब हम इंग्लैंड से दूसरे देशों की तुलना करते हैं, तब हम आज के इंग्लैंड की बात करते हैं, हम सुधारों से पहले की बात बहुत ही कम सोचते हैं। हम यह सोचते हैं कि दूसरे सभी देश अज्ञानी और असभ्य हैं। उनमें इतना सुधार नहीं हुआ है जितना कि हमारे देश में हुआ है, यद्यपि हमारे देश में हाल ही में उनकी अपेक्षा कम सुधार हुआ है।
अतः हम पहले उन निरंकुश शासकों और लुटेरों की बात करते हैं, जिन्होंने अंग्रेजों से पहले भारत पर राज किया और यह देखते हैं कि उन्होंने क्या किया और उनके शासनकाल में लोगों की क्या दशा थी। ईस्ट इंडिया कम्पनी के राज में भारत के लोगों की आर्थिक दशा के बारे में सही अनुमान लगाने के लिए यह जानना नितान्त आवश्यक है। हमें प्राचीन काल में भारत की आर्थिक सम्पन्नता का विस्तृत विवेचन करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हम पहले ही इस पर विस्तार से विचार कर चुके हैं।
सभी हिंदू और मुसलमान यह मानते हैं कि जिस समय मुसलमानों की भारत पर जीत हुई उस समय भारत काफी सम्पन्न था। कन्नौज का वैभव और सोमनाथ की धन-दौलत उसका प्रमाण है। यह सोचना एक गलती है कि भारत के मुसलमान शासक बर्बर और निरंकुश थे। दूसरी ओर, उनमें से अधिकांश असाधारण चरित्र के लोग थे। गजनी के मुहम्मद ने श्रेष्ठ व्यक्तियों के प्रति काफी उदारता दिखाई। उनकी राजधानी में इतने अधिक प्रतिभावान थे कि एशिया में कभी भी किसी दूसरे राजा के समय इतने प्रतिभावान व्यक्ति