अध्याय-3 : ब्रिटिश सरकार से पूर्व का भारत - Page 71

56 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

समतल पर होती थीं जिनमें सिद्धान्तों का कोई स्थान नहीं होता था। अतः लोगों में भौतिक पदार्थ प्राप्त करने की होड़ लग गयी। सोना ही सबसे बड़ी आकांक्षा बन गयी। उस समय सोने को कितना महत्त्व दिया जाता था, इसके भारत में बहुत उदाहरण मिलते हैं। ख्1,

1757 में प्लासी की लड़ाई और 1761 में वंदवाश की लड़ाई के बाद बंगाल तथा मद्रास में अंग्रेजों को प्रभुत्व हो गया। अतः उन्होंने दोनों जीत का पूरा लाभ उठाया। प्लासी की लड़ाई में विजय के बाद क्लाइव वास्तव में राजा बनाने वाला बन गया। उसने अपना समर्थन उस नवाब को बेच दिया जिसने उससे अच्छी शर्तों का वायदा किया। नवाब व जागीरदारों से उसने केवल मोटी रिश्वतें ही नहीं लीं और स्थानीय अधिकारियों की इच्छाओं के विरुद्ध नमक पर एकाधिकार ही नहीं किया बल्कि उन्हें कुछ व्यवसायों पर एकाधिकार जमाने की पूर्ण स्वतन्त्रता दी जिससे मूल निवासियों का रोजगार ठप्प हो गया। परिणाम यह हुआ कि लोग बहुत परेशान व गरीब हो गये। मैकाले ने क्लाइव की सम्पत्ति व लोगों की गरीबी का विस्तार से वर्णन किया है। उनका कहना हैµ फ्क्लाइव के लिए धन की कोई कमी नहीं थी, वह जो चाहता, ले सकता था। उसके लिए बंगाल का खजाना खोल दिया गया था। भारतीय राजाओं द्वारा प्रयोग के पश्चात् वहाँ सिक्कों के ढेर लग गये थे। इन सिक्कों में विदेशी सिक्के भी थे जिनसे किसी यूरोपीय जहाज के आशा अन्तरीय में आने से पूर्व, वेनटियों ने पूर्व के ऊनी कपड़े और मसाले खरीदे थे। क्लाइव के आगे सोने-चाँदी और मुकुट के मालिकों तथा हीरों के ढेर लगा दिये गये और वह जो चाहता ले सकता था।य् इस प्रकार कलकत्ता में बड़ी तेजी से विपुल सम्पत्ति एकत्र हो गयी जबकि तीस लाख इन्सानों की दशा अत्यन्त दयनीय हो गयी। अंग्रेजों का कुशासन इतना निकृष्ट कोटि का था कि एक समाज के अस्तित्व में होने की कल्पना ही नहीं की जा सकती। रोम का उप वाणिज्य दूत, जिसने एक या दो वर्षों में एक प्रांत में कैमपोमिया के तटों पर संगमरमर के महल और स्नान घर बनाने, अम्बेर से पानी, चहकने वाले पक्षियों की दावत करने, तलवारियों की सेनाओं और जराफों के समूहों का प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी थी, स्पेन का वायसराय जिसने मैक्सिको या लीमा को छोड़ कर सजे-सँवरे यानों को एक लम्बे कारवाँ और चाँदी के साज और नाल चढ़े लद्दू घोड़ों के साथ मदरीर में प्रवेश किया था, अब पीछे रह गये।

क्लाइव ने बंगाल की जनता को बर्बाद कर दिया। पहला गवर्नर जनरल हेस्टिंग महाराजा बन यगा। उनके द्वारा बनारस के राजा व अवध की बेगमों के साथ दुर्व्यवहार किये जाने और उनसे धन ऐंठे जाने तथा रोहेल्लों की सामूहिक हत्या किये जाने से 18वीं शताब्दी के महान राजनैतिक दार्शनिक एडमंड वर्क में उदार सहानुभूति जागृत हुई और उसने वारेन हेस्टिंग्स के विरुद्ध महाभियोग चला दिया, जैसा कि सिसरों ने इन्हीं कारणों से वरेस के

  1. सी.बी. हर्टज ‘द ओल्ड कोलोनियल सिस्टम’ पृष्ठ 4