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विरुद्ध किया था। वर्क ने पददलितों का समर्थन किया और उनके प्रति किये गये अन्याय को दूर करने और अपराधियों को दंडित करने का हर सम्भव प्रयास किया। उनके द्वारा जोरों से महाभियोग चलाये जाने और शेरडीन द्वारा इसमें सक्रिय भाग लिए जाने के बावजूद महाभियोग असफल रहा, लेकिन इसका प्रभाव हितकारी रहा। यह एक ऐसी असफलता थी जो सौ जीतों के बराबर थी। लार्ड मोरले ने फ्लाइफ ऑफ बर्कय् में कहा है, फ्हेस्टिंग्स का निर्दोष ठहराया जाना कोई बड़ी बात नहीं है। उनके विरुद्ध महाभियोग चलाए जाने से एक बड़ा सबक यह मिला है कि एशिया के लोगों के कुछ अधिकार हैं और यूरोपीय लोगों के कुछ कर्तव्य हैं। एक उच्च जाति का कर्तव्य है कि वह पराधीन जाति के साथ अपने सभी व्यवहारों में तत्कालीन नैतिकता के उच्चतम सिद्धान्तों का पालन करें।य् प्रथम धर्म प्रचारक होने तथा अपने देशवासियों तथा उनके दीन आश्रितों के बीच दया और प्रतिष्ठा के पक्षधर होने के नाते श्री वर्क हमारी चिरस्थाई श्रद्धा के पात्र हैं।
इसके परिणामस्वरूप प्रत्यक्ष रूप से प्रशासनिक शोषण को आरम्भ में ही रोक दिया गया। किन्तु प्रशासन द्वारा कुछ अन्य परोक्ष तरीकों से शोषण किया जाता रहा अथवा होने दिया जाता रहा। शोषण के इन अप्रत्यक्ष तरीकों से अन्तर्देशीय परिवहन शुल्क आता है। कम्पनी के नौकर प्राइवेट व्यापार कर सकते थे और इस कारण उन्हें कोई शुल्क नहीं देना पड़ता था, लेकिन मूल निवासियों पर इस प्रकार के सभी शुल्क लगाए जाते थे और कड़ाई से वसूल किये जाते थे जिससे उनकी आर्थिक खुशहाली पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा।
इन शुल्कों के बारे में श्री होल्ट मैकेंजी का कहना हैµ फ्कुछ चीजों को प्रेसीडेंसी पहुँचने से पहले दस सीमाशुल्क कार्यालयों और उनके अधीनस्थ कई चौकियों से होकर गुजरना पड़ता है देश की टिकाऊ चीजों में से ऐसी बहुत कम चीजें हैं अथवा कोई भी नहीं है, जिनको बार-बार न रोका जाता हो। यह मान भी लिया जाये कि कोई वसूली नहीं की जाती थी और कोई विलम्ब नहीं होता था, तो भी इस प्रणाली से देश के वाणिज्यिक सम्बन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है, क्योंकि चौकियों की एक कतार से पृथक किये गये जिलों के बीच माल की अदला-बदली नहीं हो सकती। यदि मूल्यों में इतना अन्तर नहीं है कि न केवल सौदे पण्य की परिवहन लागत और अन्य खर्चे पूरे हों अपितु सरकार द्वारा लगाया गया 5 या 7 ½ प्रतिशत शुल्क भी पूरा हो जाये। इससे भी मूल्यों में स्वाभाविक असमानता बढ़ जाती है और खपत कर के मामले में लागू प्रत्येक सिद्धान्त के उचित होने के बावजूद इसका बोझ उन स्थानों पर पड़ता है जहाँ उपभोक्ताओं को शुल्क न होने पर भी अधिकतर भुगतान करना पड़ता है। लेकिन जब सरकारी माँग के साथ-साथ सीमा शुल्क कार्यालयों के अधिकारियों द्वारा भी माँग की जाती है तो यह निश्चित प्रतीत होता है कि कम पूँजी वाले लोगों का व्यापार काफी हद तक बन्द हो जाएगा। अमीर व्यापारी से तो जितनी भी माँग की जाये वह भुगतान कर सकता है क्योंकि निवेश की राशि काफी है अतः बहुत सी राशि का भुगतान करने पर