58 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
भी उसका इतना असर नहीं होगा और अमीर आदमी अपने धन के बल पर अन्यायपूर्ण
खसोट से बच जाएगा। लेकिन एक छोटे-मोटे व्यापारी पर मामूली-सा शुल्क लगाने पर भी उसको होने वाला लाभ चौपट हो जाएगा और वह सन्तुलन नहीं बना रख पाएगा।
ऐसा प्रतीत होता है कि अब इंग्लैंड के अधिकारियों और व्यापारियों का ध्यान मुख्य रूप से युनाइटेड किंगडम में बनी वस्तुओं के लिए बाजार खोजने की ओर गया है। यही कारण है कि उन्होंने भारत से निर्यात की अपेक्षा भारत में आयात की ओर अधिक ध्यान दिया है। तदनुसार 1810 के विनिमय 9 के अन्तर्गत इंग्लैंड से भारत भेजी जाने वाली बहुत सी वस्तुओं पर शुल्क नहीं लगाया है जबकि निर्यात की जाने वाली वस्तुओं में केवल नील, कपास, ऊन और गांजा पर ही शुल्क नहीं लगाया गया है और मैं समझता हूँ ऐसा भारत को लाभ पहुँचाने की बजाय इंग्लैंड को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से किया गया है।य्
इन अन्तर्देशीय परिवहन शुल्कों के बारे में लार्ड ऐलनब्रो ने जो कुछ कहा है उसे जानना भी लाभप्रद होगाµ फ्जबकि इंग्लैंड में बनी कपास की वस्तुओं का आयात करने पर उन पर 2 ½ फीसदी शुल्क का भुगतान करना पड़ता है, भारत में बनी कपास की वस्तुओं के मामले में पहले धागे पर 7 ½ फीसदी अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है और फिर निर्मित वस्तुओं पर 2 ½ फीसदी अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है। इसके पश्चात 2 ½ फीसदी शुल्क तब देना पड़ता है जब कपड़े की रंगाई इसे श्वेत कपड़े के रूप में बाहर ले जाने का पास ले लेने के बाद की जाती है। इस प्रकार कुल मिला कर भारत में बनी और भारत में इस्तेमाल की जाने वाली सूत से बनी वस्तुओं पर 17 ½ फीसदी शुल्क देना पड़ता है। खाल पर 5 फीसदी शुल्क लगता है और इससे चमड़ा बनाया जाता है तो 5 फीसदी शुल्क और देना पड़ता है। चमड़े से बूट और जूते बनाने पर 5 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगता है। इस प्रकार भारत में बनी और भारत में इस्तेमाल की जाने वाली चमड़े की वस्तुओं पर कुल मिलाकर 15 फीसदी शुल्क लगता है। हम अपनी चीनी के मामले में भी क्या करते हैं? एक कस्बे में चीनी का आयात करने पर 5 फीसदी सीमा शुल्क लगता है और 5 फीसदी नगर शुल्क लगता है और जब इसे उस कस्बे से बाहर भेजा जाता है तो 5 फीसदी और शुल्क देना पड़ता है। इस प्रकार भारत में बनी और भारत में इस्तेमाल की जाने वाली चीनी पर कुल 15 फीसदी शुल्क लगता है। कम से कम 235 वस्तुओं पर अन्तर्देशीय शुल्क लगते हैं। निजी अथवा घरेलू प्रयोग की प्रायः सभी वस्तुओं पर शुल्क लगता है। इसकी वसूली और जाँच पड़ताल प्रणाली बहुत ही कष्टदायक और आपत्तिजनक है और इससे वास्तव में राजस्व विभाग को कोई लाभ नहीं होता। प्रत्येक सीमा शुल्क अधिकारी वास्तव में तलाशी के अधिकार का प्रयोग करे, तो अनिवार्य रूप से इससे जो विलम्ब होगा, उससे अन्तरिक व्यापार बन्द हो जाएगा। इस अधिकार का प्रयोग लूट-खसोट के लिए ही किया जाता है, अन्यथा नहीं।य्