अछूत और ब्रिटिश सरकार - Page 80

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सोलहवीं शताब्दी में मसालों का कितना प्रयोग करते थे या उनका रसास्वादन करते थे, यह प्रोफेसर चैने द्वारा एकत्र किये गये निम्नलिखित आँकड़ों से स्पष्ट हो जाएगा। ख्1,

फ्मध्यकाल में मुख्य विलास वस्तु के रूप में खाने वाले मसाले, शराब और बीयर का विभिन्न प्रकार के मसालों के साथ लगातार प्रयोग होता था। सर थोपा के जंगल में जावित्री पैदा होती थी और बीयर तैयार किया जाता था। प्रोइसारट राजा के अतिथियों को महल में ले जाया जाता था, तो उनके आगे शराब और मसाले रखे जाते थे। मार्सलेज की एक लड़की के दहेज में 1224 ई. में अदरख, इलायची, जावित्री, कूर्लजन दिये गये। जोहन बाल ने सामन्तों और किसानों की दशा में वैषम्य दिखाते हुए कहा, उन्हें शराब, मसाले और बढि़या रोटी मिलती है, तो हमें राई और घास-फूस मिलती है। जब पुराने लटीनर को खूंटे से बाँधा जा रहा था, तो उसने यादगार के रूप में अपने दोस्तों को जायफल दिया। मिर्च जो बहुत ही साधारण वस्तु है और साथ ही सबसे मूल्यवान मसाला है, उपहार के रूप में धन के स्थान पर अक्सर दी जाती थी। फ्मटिलडा चौसर, राजा को उपहार के रूप में मिला, और उसकी भूमि का मूल्य 8 पौंड 2 शिलिंग 1 पेंस और एक पौंड मिर्च, 1 पौंड दालचीनी व 1 ओंस रेशम था।य् इस बात का उल्लेख एक प्राचीन अंग्रेजी सर्वेक्षण में है। इन मसालों की माँग और खपत आश्चर्यजनक है। वीनस, इटली तथा भूमध्य देशों के कई जहाज इन चीजों से भरे पश्चिम की ओर आते थे और इन चीजों की बिक्री हर जगह मेलों और बाजारों में होती थी। मिर्च की शराब को गम्भीर रूप से नहीं लिया जाता था, फिर भी इसकी बेकदरी नहीं होती थी। जर्मनी के लुटेरे सामन्तों ने व्यापारियों पर इसका प्रयोग किया, जिन्हें उन्होंने राइन नदी पार करने पर लूट लिया। वीनस के व्यापारियों ने मिस्र के सुलतान के साथ कई वर्षों के लिए इकरारनामा किया हुआ था, जिसके अन्तर्गत सुलतान से हर वर्ष 420,000 पौंड मिर्च खरीदी जानी थी। आरम्भ में जो जहाज भारत पहुँचे, उनमें से एक में 210,000 पौंड मिर्च लायी गयी। 1520 ई. में पुर्तगाल ने भारत के एक राजा पर 200,000 पौंड मिर्च का जुर्माना लगाया। इतिवृत्तों, पाकशास्त्र, व्यापार सूचियों तथा सीमा शुल्क सूचियों में मसालों का जिक्र आज की ही तरह बार-बार आया है।य्

उस समय के यूरोप के लोगों के लिए मसाले इतने आवश्यक क्यों थे? इसका एक उत्तर हैµस्वाद। मध्य युगीन यूरोप में खाना मोटे अनाज का बना होने, ठीक ढंग से न बना होने और एक जैसा होने के कारण, उसमें कई कमियाँ महसूस होती थीं जिन्हें काफी मात्रा में प्राच्य मसाले डालकर पूरा किया जाता था। ख्1, जहाँ सभी के लिए यह स्वाद का मामला था, गरीबों के लिए यह आवश्यकता थी। गरीबों को मसालों की जरूरत थी। प्राचीन काल में जब अन्न की कमी थी और मशीनें न होने के कारण मनुष्य की उत्पादकता बहुत कम थी तो चीजों को बर्बाद करना या बासी समझकर फेंक देना सम्भव नहीं था। जो कुछ खाना बच जाता था या तत्काल खपत के लिए आवश्यक नहीं होता था उसे सम्भाल कर रखा जाता था। मसाले तो सबसे बढि़या प्रिजरवेटिव हैं। इस कारण तथा इसके साथ ही स्वाद

  1. चेने, पृष्ठ 10