अछूत और ब्रिटिश सरकार - Page 84

69

पन्द्रहवीं शताब्दी के अंत में जो देश अचानक अंग्रेजों के लिए खुल गये वे देश तीन श्रेणियों के थे। वास्कोडिगामा ने वे देश खोले, जिनमें अधिकांश क्षेत्र अधिक आबादी वाले थे और जिन पर पुराने राजा राज करते थे और जो व्यापक तथा संगठित राज्य थे। दूसरी श्रेणी के देशों की खोज कोलम्बस ने की, जिनमें जनसंख्या कम थी और राज्य मौलिक चरित्र का था। तीसरे क्षेणी के देशों की खोज भी ..... (किसी ने) की, जिनमें क्षेत्र खाली थे और कोई आबादी नहीं थी। भारत तीनों श्रेणी में से पहले में आता है।

भारत की जीत को असाधारण घटना होने का दूसरा कारण वह अवधि है, जिसमें जीत हुई। भारत कब जीता गया? भारत 1757-1818 के बीच जीत गया।

1757 में एक लड़ाई ईस्ट इंडिया कम्पनी और बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला की फौजों के बीच लड़ी गयी। इसमें अंग्रेजों की फौजें जीतीं। इतिहास में इसे प्लासी की लड़ाई कहते हैं। इस लड़ाई का ही परिणाम है कि अंग्रेजों ने प्रथम बार भारत में कोई क्षेत्र जीता। अन्तिम लड़ाई जिसमें क्षेत्रीय जीत पूरी हुई, वह 1818 में लड़ी गयी। इसे कोरेगाँव की लड़ाई कहा जाता है। यह वह लड़ाई थी, जिसमें मराठा साम्राज्य नष्ट हुआ और उसके स्थान पर अंग्रेजी साम्राज्य भारत में जम गया। इस प्रकार अंग्रेजों ने भारत को 1757-1818 के बीच जीता। इस बीच यूरोप में क्या स्थिति थी और अंग्रेजों की क्या दशा थी? यह समय यूरोप में खलबली का समय था। वह नेपोलियन की लड़ाइयों का समय था, जिसकी अन्तिम लड़ाई 1815 में वाटरलू में लड़ी गयी थी। इन लड़ाइयों में इंग्लैंड एक मूक दर्शक नहीं रहा। इन लड़ाइयों में इंग्लैंड ने भी सक्रिय भाग लिया। वह उन सभी यूरोपीय राज्यों का अग्रणी था, जिन्होंने नेपोलियन तथा फ्राँस की नीति को कुचलने के लिए गठबन्धन बनाये। इस भयंकर युद्ध में अंग्रेजी राष्ट्र ने अपने बचाव के लिए सब कुछ धन-दौलत, जनशक्ति, जहाज, तोपें आदि दाँव पर लगा दिये। ईस्ट इंडिया कम्पनी को वे कुछ भी नहीं दे सके। सिर्फ यही नहीं कि उन्होंने ईस्ट इंडिया कम्पनी की सहायता के लिए उन्हें कुछ नहीं दिया, अपितु वास्तव में इन्होंने यूरोप की लड़ाई में नेपोलियन का सामना करने के लिए ईस्ट इंडिया कम्पनी से आर्थिक और सैनिक सहायता के अलावा जहाज आदि भी उधार लिये। ईस्ट इंडिया कम्पनी ने अंग्रेजी साम्राज्य की यूरोप की लड़ाई में कितनी सहायता की, इसका मैकफरसन के निम्नलिखित विवरण से पता चलता हैµ जब अंग्रेज नेपोलियन के साथ यूरोप की घातक लड़ाइयों में पूर्णतः व्यस्त थे और ईस्ट इंडिया कम्पनी की भारत को जीतने में किसी प्रकार की सहायता नहीं कर सकते थे, उसी समय ईस्ट इंडिया कम्पनी ने भारत को जीता। यही कारण है कि भारत की जीत एक असाधारण घटना है। यह असाधारण घटना कैसे संभव हुई। इसका क्या स्पष्टीकरण है? इस बारे में मैकाले ने अपना स्पष्टीकरण दिया है। मैकाले के स्पष्टीकरण पर सभी अंग्रेज विश्वास करते हैं। (स्पष्टीकरण का उद्धरण पांडुलिपि में उपलब्ध नहीं है।)