70 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
काफी समय तक प्रचलित रहने के कारण इसने अंग्रेजों, यूरोपीयों और अमरीकी लोगों के मन पर एक छाप छोड़ी है। निस्सन्देह अंग्रेजों की युवा पीढ़ी के मन में भी यही विचार भरने का प्रयास किया जाता है। यह स्वाभाविक भी है। अपने आप को श्रेष्ठ समझना राजसी वंश का एक महत्त्वपूर्ण लक्षण है और मैकाले ने जो कुछ कहा है वह इसके अनुकूल ही है।
लेकिन क्या मैकाले का विचार सही है? क्या इतिहास के तथ्य इसकी पुष्टि करते हैं? प्रोफेसर सीले, जिन्होंने इस विषय का मैकाले से अधिक यथार्थ तरीके से अध्ययन किया है, कहा था, फ्कम्पनी की आरम्भिक लड़ाइयों में जिनके द्वारा कम्पनी की सत्ता सुदृढ़ रूप से स्थापित हो गयी थी, प्लासी में, बक्सर में तथा आरकोट की जीत में अधि कतर सदैव यह देखा गया कि कम्पनी की ओर से लड़ने वाले लोगों में यूरोपीयों की अपेक्षा भारतीय सिपाही अधिक थे। इसके अलावा हमें यह भी सुनने में नहीं आया कि भारतीय सिपाही ठीक ढंग से नहीं लड़े या दबाव केवल अंग्रेजों पर पड़ा हो। किसी ने कहा है कि इतिहासकार बच्चों की तरह उत्सुक्ता से अपने राष्ट्र का गुणगान करते हैं। ऐसा व्यक्ति भी यह जानकर हैरान नहीं होगा कि इन लड़ाइयों का वर्णन करते समय अंग्रेज लेखक भी हमारे सिपाहियों की पहचान नहीं कर पाए। मैकाले ने क्लाइव पर अपने निबन्ध में कहा है, फ्हर स्थान पर अंग्रेज, समुद्र के शक्तिशाली बच्चे जैसे दिखाई देते हैं।य् इसीलिए कोई भी क्लाइव और उसके अंग्रेज सैनिकों का मुकाबला नहीं कर सका। लेकिन यदि एक बार मान लिया जाए कि भारतीय सिपाहियों की संख्या अंग्रेजों से सदैव अधिक होती थी और वे अंग्रेजों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते थे और अच्छे सिपाही थे तो हमारा यह सिद्धान्त निर्मूल हो जाता है कि उन्हें सफलता इसलिए मिली की बहादुरी में वे स्वाभाविक रूप से दूसरे से आगे थे। उन लड़ाइयों में जिनमें हमारे सैनिकों की संख्या और दुश्मनों के सैनिकों की संख्या में 1/10 अनुपात था तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि एक अंग्रेज 10 मूल निवासियों के बराबर था। हम एक सिपाही के बारे में भी यही कह सकते हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि यद्यपि अन्तर था तो वह अन्तर वंश अलग होने के कारण नहीं था, बल्कि अनुशासन और सैनिक विज्ञान में अन्तर होने के कारण था। निस्सन्देह अनेक मामलों में नेतृत्व में अन्तर होने के कारण था।य्
भारत की जीत के बारे में मिल के संक्षिप्त स्पष्टीकरण से पता चलता है कि अंग्रेज प्राकृतिक दृष्टि से श्रेष्ठ नहीं थे। भारत की जीत के बारे में दो महत्त्वपूर्ण तथ्यों का पता लगा है। एक तो यह कि देशी सेनाएँ अनुशासन के मामले में यूरोपीय सेनाओं से कमजोर थीं। दूसरा यह कि यूरोपीय सेना में देशी लोगों को अनुशासित करने की सुविधा उपलब्ध थी। उन्होंने आगे कहा हैµ फ्ये दोनों खोजें फ्राँसीसियों ने कीं।य्
यदि हम यह मान भी लें कि अंग्रेज भारतीय सिपाहियों की तुलना में अच्छे लड़े और जो कुछ प्राप्त हुआ उसमें अपने भाग से अधिक पाया जबकि दोनों ने मिलकर कार्य किया, यह कहना सर्वथा गलत होगा कि अंग्रेजों ने भारत के राज्यों को जीता।