अछूत और ब्रिटिश सरकार - Page 87

72 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

कोशिश थी। यह अंग्रेजों को निकालने और भारत को वापस लेने की एक कोशिश थी जहाँ तक फौज का सम्बन्ध है, विद्रोह का संचालन बंगाल सेना ख्1, कर रही थी। बम्बई और मद्रास की फौजें निष्ठावान बनी रहीं। यह उनकी मदद के कारण ही था कि विद्रोह को दबाया जा सका। बम्बई और मद्रास की सेनाओं में कौन लोग थे? इनमें अधिकतर अछूत थे। बम्बई में महार और मद्रास में परिवाह थे। अतः यह कहना सच है कि अछूतों ने केवल जीतने में ही अंग्रेजों की सहायता नहीं की, अपितु भारत को अपने अधिकार में लेने में भी सहायता की।

जहाँ तक फौज में नौकरी का सम्बन्ध है, अंग्रेजों ने अछूतों के साथ किस प्रकार का व्यवहार किया? बड़ा विचित्र तो लगेगा, लेकिन उत्तर यह है कि अंग्रेज सरकार ने लगभग 1890 से अछूतों के अंग्रेजी फौज में भर्ती पर रोक लगा दी। परिणाम यह हुआ कि जिनकी भर्ती पहले हो चुकी थी वे सेना में रहे। यह बहुत बड़ी दया है कि उनको निकाला नहीं गया, लेकिन समय के साथ वे मर गये या पेंशन पर चले गये और आखिरकार 1910 तक फौज से पूर्णतः समाप्त हो गये। अछूतों को फौज से इस तरह निकालने से अधिक अपमानजनक कुछ भी नहीं हो सकता।

अंग्रेजों ने ऐसा काम क्यों किया जो विश्वासघात व अनिष्ठा का प्रतीक है? अंग्रेजी फौज में अछूतों की भर्ती पर लगे इस प्रतिबन्ध का कोई उत्तर अंग्रेजों ने कभी नहीं दिया है। प्रायः यह सुना जाता है कि अछूतों की भर्ती पर यह प्रतिबन्ध जानबूझ कर नहीं लगाया गया था। अपितु यह उस नीति का परिणाम है जो वर्ष 1890 के करीब सेना की कार्यकुशलता में सुधार लाने के उद्देश्य से की गयी।

लेकिन क्या यह सही है? यह नीति दो सिद्धान्तों पर आधारित है। एक संगठन और दूसरा भर्ती सम्बन्धी। संगठन का सिद्धान्त, जो 1890 से लागू किया गया था वर्ग-संयोजन नाम से जाना जाता है, जबकि पहले मिश्रित रेजीमेंट का सिद्धान्त लागू था। नये सिद्धान्त के अनुसार भारतीय फौज का संगठन वर्ग रेजीमेंट या वर्ग स्क्वाड्रन या कम्पनी पद्धति पर आधारित बनाया गया। इसका अर्थ यह है कि पहले मामले में, सम्पूर्ण रेजीमेंट में एक वर्ग या एक जाति के लोग हैं दूसरे मामले में प्रत्येक स्क्वाड्रन या कम्पनी में पूर्णतः एक वर्ग या जाति के लोग हैं। भर्ती के पुराने सिद्धान्त के अनुसार उपलब्ध लोगों में से सर्वोत्तम लोगों की भर्ती की जाती थी, उसकी जाति या धर्म चाहे जो भी हो। नये सिद्धान्त के अधीन लोगों के स्वभाव और बुद्धि की अपेक्षा इसकी जाति की ओर अधिक ध्यान दिया जाने लगा। भर्ती के प्रयोजनार्थ भारत की विभिन्न जातियों एवं सम्प्रदायों को लड़ाकू और

  1. बंगाल सेना इसलिए कहलाती थी, क्योंकि यह बंगाल की सरकार के अधीन थी। इसलिए नहीं कि

इसमें बंगाली थे। इसमें कोई भी बंगाली नहीं, बल्कि यह उत्तरी भारत के लोगों से बनी थी।