अछूत और ब्रिटिश सरकार - Page 88

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गैर-लड़ाकू जातियों में बाँटा जाता है। गैर-लड़ाकू जातियों को फौज में भर्ती नहीं किया जाता है। केवल लड़ाकू जातियों की श्रेणी में आने वाली जातियों और सम्प्रदायों के लोगों को सेना में भर्ती किया जाता है।

इन दो सिद्धान्तों को स्वीकार करना कठिन है। वर्ग रचना का सिद्धान्त कुछ हद तक राजनैतिक कारणों से लागू किया गया था, क्योंकि इसका उद्देश्य अंग्रेजों के खिलाफ कोई ठोस संघ जैसा कि विद्रोह में हुआ, न बनने देना था। मुझे यह मान लेना चाहिए था कि मिश्रित रेजिमेंट की पद्धति अधिक सुरक्षित है। ख्1, किन्तु यह मान लिया जाये क यह सिद्धान्त उत्तम है तो फिर यह अछूतों की भर्ती में आड़े क्यों आया? यदि वर्ग रचना पद्धति के अन्तर्गत सिखों, डोगरों, गोरखों, राजपूतों आदि की रेजीमेंट हो सकती है, तो अछूतों की रेजीमेंट क्यों नहीं हो सकती? इसी प्रकार यदि यह मान लिया जाये कि केवल लड़ाकू जातियों के लोगों की भर्ती करने का सिद्धान्त ही सही है, तो इसका अछूतों पर प्रतिकूल प्रभाव क्यों पड़ा? क्या उनको लड़ाकू जाति नहीं समझा जाता? इसके अलावा उन्हें अछूत कहने में क्या औचित्य है, जो गैर-लड़ाकू होते हुए भी 150 वर्षों से अधिक समय तक भारतीय सेना का मुख्य आधार बने रहे। ब्रिटेन की सरकार अछूतों को गैर-लड़ाकू जाति के लोग नहीं मानती, यह बात इस तथ्य से सिद्ध हो जाती है कि महायुद्ध में जब फौज के लिए अधिक आदमियों की आवश्यकता थी तो सेना से अछूतों की भर्ती पर लगी यह पाबन्दी हटा ली गयी थी और एक पूरी बटालियन खड़ी की गयी थी जिसे ‘महार’ नाम से जाना जाता था। इसकी कार्य क्षमता ने इसे प्रमाणित किया है। जब इस बटालियन की आवश्यकता नहीं रही और अछूतों के नाराज तथा क्षुब्ध होने पर भी, इसे खत्म कर दिया गया, तो सर (नाम नहीं दिया है) ने कहाµ (पांडुलिपि में उद्धरण नहीं है)

इस प्रमाण के उपलब्ध होने पर कौन कह सकता है कि अछूत गैर-लड़ाकू जाति के हैं? अतः यह स्पष्ट है कि उक्त दो कारणों से अछूतों को सेना से बहिष्कृत नहीं किया गया। तो फिर सही कारण क्या है? मेरे विचार से अछूतों को फौज से बहिष्कृत करने का सही कारण उनका अछूत होना है। फौज में अछूतों का तब तक तो स्वागत किया गया, जब तक कि फौज में उनकी भर्ती से कोई विवाद पैदा नहीं हुआ। ब्रिटिश इतिहास के आरम्भिक चरण में ऐसी कोई समस्या नहीं थी, क्योंकि सवर्ण अंग्रेजी फौजों से बाहर रहे। जब, भारतीय विद्रोह के पश्चात्, देशी राजा प्रभावहीन हो गये तो हिंदू अंग्रेजी फौज में भर्ती होने लगे, जो पहले से ही अछूतों से भरी थी। तब एक समस्या उत्पन्न हुई। दोनों समुदायों के बीच सामंजस्य स्थापित करने अर्थात सवर्णों और अछूतों को उचित स्थान दिलाने की समस्या पैदा हुई। अंग्रेजों ने, जो सदैव न्याय और सुविधा के बीच टकराव की स्थिति में

  1. देखिएµ जनरल विलकाक्स की ‘विद इंडियन्स इन फ्राँस’ में दी गई राय। पांडुलिपि में पृष्ठ नहीं दिया गया

है।