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और व्यावहारिक ज्ञान का प्रसार उस विशाल जन समूह में कैसे किया जाये जो अपने प्रयासों से नाम-मात्र भी शिक्षा प्राप्त करने की क्षमता नहीं रखते और हम चाहते हैं कि सरकार विशेष रूप से भविष्य में इस विषय की ओर अधिक ध्यान दे जिसको पूरा करने के लिए हम बहुत अधिक व्यय की मंजूरी देने के लिए तैयार हैं।य् यह मानना ठीक ही है कि इस देश में डिस्पैच ने देश में जनसाधारण के लिए शिक्षा की नींव रखी। इस नीति के परिणामों पर सर्वप्रथम 1882 में भारत में शिक्षा सम्बन्धी हंटर आयोग ने विचार किया। निम्नलिखित आँकड़ों से स्पष्ट हो जाता है कि गत 28 वर्षों की अवधि में क्या उपलब्धि रहींµ
प्राथमिक शिक्षा
1881-82
स्कूलों में विद्यार्थियों कुल छात्रों की तुलना
की संख्या में प्रतिशत
ईसाई 1521 49
ब्राह्मण 63,071 20.17
अन्य हिन्दू 202,345 64.49
मुसलमान 39,231 12.54
पारसी 3,517 1.12
आदिवासी व 2,713 .87
पहाड़ी कबीले
निम्न जाति हिन्दू 2,862 .87
यहूदी और अन्य 373 .12
माध्यमिक शिक्षा
1881-82
मिडिल हाई
स्कूलों में विद्यार्थियों की स्कूलों में विद्यार्थियों की
संख्या प्रतिशत संख्या प्रतिशत
ईसाई 1,419 12.6 111 2.26
ब्राह्मण 3,639 30.70 1,978 40.29
अन्य हिन्दूः किसान 624 5.26 140 2.85
निम्न जातियाँ 17 .14 - -
अन्य जातियाँ 3,823 32.25 1,573 32.04
मुसलमान 687 5.80 100 2.04
पारसी 1,526 12.87 865 19.66
आदिवासी व पहाड़ी 06 0.05 - -
कबीले
अन्य (यहूदी आदि 103 .87 92 .86
को मिलाकर