पुनरीक्षण अधिकारिता - Page 103

86 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

दृष्टांतः-

अ एक्स पर दावा करता है कि क के जानवरों द्वारा अ की फसल की क्षतिपूर्ति के लिए एक्स द्वारा एक कथन को दिखाने के प्रयोजन के लिए कि उसके जानवर क्षति करने के कारण थे। एक्स ब का साक्ष्य प्रस्तुत करता है इस प्रभाव से कि एक्स ने कहा कि क्षति को पूरा करने के लिए उसने कुछ धन देने का प्रस्ताव रखा था।

यह एक अभिकथन है जो अनुमान की पुष्टि कर सकता है कि एक्स मानता है कि उसके जानवर ने ही क्षति की थी।

दृष्टांतः-

अ अपनी भेड़ों की हानि के लिए एक्स पर आरोप लगाते हुए कहता है कि एक्स के कुत्ते ने उनको मार डाला था। प्रमाण के रूप में उसने साक्ष्य प्रस्तुत किया कि एक्स ने उस समय कहते हुए कि वह कोई और भेड़ नहीं मारेगा, अपने कुत्ते को मार दिया है।

क्या यह एक ग्रहण है?

II. वह धारा 18-20 में उल्लिखित व्यक्तियों द्वारा किया जाना चाहिए।

  1. धारा 18-20 इस भेद को दर्शाता है कि कारण उल्लिखित संवर्गों में आते हैं।

(1) वह व्यक्ति जो कार्यवाहियों में एक पक्ष है, और

(2) वह व्यक्ति जो कार्यवाहियों में पक्ष नहीं है - अजनबी।

व्यक्ति जो कार्यवाही में एक पक्ष में है वह यह हैः

(1) पक्षगण

(2) पक्षों के अभिकर्त्तागण

(3) कार्यवाही की विषय वस्तु में संयुक्त हितधारी व्यक्ति, अर्थात् भागीदार, संयुक्त

संविदाकर्त्ता।

(1) अजनबी

जहां एक व्यक्ति जो अजनबी है और धारा 18 में उल्लिखित कार्यवाही के एक पक्ष से किसी प्रकार संबंधित नहीं है, का अभिकथन एक पक्ष द्वारा ग्रहण माना जा सकता है।

दो मामले

(1) अभिकथन उस रेफ्री का है - धारा 20

II. जब उस अजनबी का दायित्व या अवस्थिति कार्यवाही की विषय वस्तु है।

और

(2) जब अजनबी का अभिकथन और उसके दायित्व का उसके द्वारा ग्रहण के समान जैसा हो, अर्थात् वह धारा 17-18 के अंतर्गत आना चाहिए।

दृष्टांत - धारा से - दायित्व का।