88 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
एक वर्ग है।
- निम्नोक्त चित्र सारिणी संबंध निदर्शित करती है।
अभिकथन
वे जो स्वीकृति के अंतर्गत वे जो स्वीकृति के अंतर्गत
आते हैं नहीं आते
स्वीकृति जो अपराध-स्वीकरण स्वीकृति जो अपराध-स्वीकरण के
के समान है समान नहीं है
- अपराध-स्वीकरण एवं स्वीकृति में समान लक्षण हैं और वे दोनों में हैं और
कार्यवाहियों में एक पक्ष द्वारा किए गए अभिकथन हैं।
- दो प्रश्न उठते हैं।
(1) एक अभिकथन एक स्वीकृति है तथापि वह स्वयं पक्ष द्वारा नहीं किया गया है। यदि वह धारा 18-20 में परिभाषित एक व्यक्ति द्वारा किया गया है, वह एक स्वीकृति होगा। क्या एक अभिकथन एक स्वीकृति जैसी श्रेणी का है? यदि वह स्वयं अभियुक्त के द्वारा नहीं किया जाता है, वरन् धारा 18-20 में उल्लिखित व्यक्तियों द्वारा किया जाता है।
- एक अपराध-स्वीकरण होने के लिए, वह स्वयं अभियुक्त द्वारा होना चाहिए।
यदि वह अभियुक्त द्वारा नहीं है, वह अपराध-स्वीकरण नहीं है।
- अभियुक्त द्वारा एक दोषायुक्त अभिकथन, जो उसको शामिल करता है किन्तु
उसको अभिशस्त नहीं करता है, अपराध-स्वीकरण नहीं है।
- एक दोषयुक्त अभिकथन जो न केवल शामिल करता है वरन् अभिशस्त (दोष
लगाता) करता है, एक अपराध स्वीकरण है।
ध्यान देने वाले विचार (बिंदु) -
अभिशासन प्रत्यक्ष हो सकता है या अनुमान द्वारा हो सकता है। एक अभिकथन जो स्वतः ही दोषसिद्धि का आधार हो सकता है, एक अपराध-स्वीकरण है।
अभिकथन अभियुक्त द्वारा स्वयं को निरपराध घोषित करने के लिए हो सकता है, किन्तु वह एक अभिशप्त करने वाली परिस्थिति का अभिकथन हो सकता है, जिस विषय में वह एक अपराध-स्वीकरण के समान होगा।
अपराध-स्वीकरण के दो प्रकार
- अपराध-स्वीकरण या तो न्यायिक या न्यायेतर हो।
(i) न्यायिक अपराध-स्वीकरण वे हैं जो एक मजिस्ट्रेट के समक्ष किए जाते हैं या विधिक कार्यवाहियों के निर्धारित क्रम में न्यायालय में।