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(ii) न्यायेत्तर अपराध-स्वीकरण वे हैं जो मजिस्ट्रेट के समक्ष या न्यायालय से कहीं अन्य जगह पक्ष द्वारा किए जाते हैं।
वे मामले क्या हैं जिनमें अपराध-स्वीकरण का साक्ष्य वर्जित किया जाता हैः
- साक्ष्य अधिनियम ने तीन संभव मामलों को विचारित किया है।
(i) पुलिस-अधिकारी से किया गया अपराध-स्वीकरण।
(ii) जब पुलिस के अधिरक्षण में अपराध-स्वीकरण किया जाता है।
(iii) अपराध-स्वीकरण जो एक व्यक्ति से किया जाता है जो एक पुलिस अधिकारी नहीं है और जो जबकि पुलिस के अधिरक्षण में नहीं किया जाता है।
(प्रथम) के संबंध में
वह धारा 25 द्वारा वर्जित है।
(द्वितीय) के संबंध में
वह धारा 25, 26 द्वारा वर्जित है।
धारा 27 का प्रभाव
6 इलाहाबाद 509 (एफ.बी.)
प्रश्न - क्या धारा 27 केवल धारा 26 का अपवाद है और धारा 25 का नहीं?
या
संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम।
अंशदान
- मान लो कि दो संपत्तियां बंधक की रखी गई हैं और वे दो भिन्न व्यक्तियों से संबंधित हैं। मान लो कि बंधक धन को वसूल करने के लिए मात्र एक संपत्ति को बेच दिया जाता है और विक्रय धन, बंधक धन की अदायगी के लिए पर्याप्त पाया जाता है। परिणामस्वरूप एक बंधक कर्त्ता अपनी संपत्ति गंवा देता है जबकि दूसरा बिना कुछ दिए उसे वापस प्राप्त करता है।
यह घोर अन्याय है। इस अन्याय के प्रतिकार हेतु साम्या (इक्विटी) ने एक समाधान आविष्कृत किया, अंशदान का सिद्धांत, जो धारा 82 में सम्मिलित है।
इस धारा के अनुसार विभिन्न स्वामी, बंधक द्वारा प्रतिभूत ऋण के शोधन में अनुपाततः अंशदान करने के दायी हैं।
वह दर जिसके आधार पर हर एक को अंशदान करना चाहिए, को निर्धारित करने के लिए, बंधक धन को घटाकर बंधक की तारीख को मूल्य के रूप में रखा जाएगा, यदि कोई है, जिसके अधीन वह उस तारीख को था।
अंशदान के लिए दावा केवल तभी उत्पन्न होता है जबकि बंधक ऋण पूर्ण रूप से चुकता हो चुका - 26 इलाहाबाद 407 (426, 27) टी.बी.