पुनरीक्षण अधिकारिता - Page 107

90 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. अंशदान का अधिकार क्रम-बंधन के नियम के अधीन है। अर्थात् जहां क्रम-बंधन अंशदान से टकराता है, वहां क्रमबंधन का नियम अविभावी होगा - यह धारा 82 के अंतिम पैरा का अभिप्राय है।

बंधककर्ता के अधिकारों का कौन दावा कर सकता है

धारा 91

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बंधकदार के अधिकारों का दावा कौन कर सकता है,

धारा 92

बंधककर्ता से अन्य कोई व्यक्ति जो बंधकदार को अदा करता है, बंधकदार के अधिकारों का हकदार हो जाता है।

ऐसे व्यक्ति हैं -

  1. पश्चात्वर्ती बंधकदार

  2. प्रतिभू

  3. संपत्ति में हित रखनेवाला कोई व्यक्ति

  4. सह-बंधककर्ता

  5. कोई अन्य व्यक्ति जिसके धन से बंधक मुक्त किया गया है,यदि बंधककर्त्ता

पंजीकृत विलेख द्वारा सहमत हो गया है।

यह प्रत्यासन का नियम कहलाता है

II. (द्वितीय) क्या विक्रय-विधि हस्तांतरण का कोई विशेष ढंग निर्धारित करती है?

  1. अचल संपत्ति की विक्रय-विधि अन्तरण का एक ढंग निर्धारित करती ही है।

अन्तरण का ढंग या तो पंजीकरण या कब्जे को प्रदान करता है।

  1. क्या अन्तरण का समुचित ढंग किसी विशेष विषय में पंजीकरण या कब्जे

का करना है, जो दो बातों पर निर्भर करता है-

( i ) क्या अचल संपत्ति साकार भूत या अभूत है।

(ii) क्या अचल संपत्ति 100/- रु. से अधिक मूल्य की है या 100 रु. से

कम मूल्य की है।

  1. यदि संपत्ति अभूत है तब अन्तरण केवल पंजीकरण द्वारा हो सकता है। कोई

बात महत्त्वपूर्ण नहीं कि संपत्ति का मूल्य क्या है।

  1. यदि संपत्ति भूत है तब

( i ) यदि वह 100/- रु. से अधिक मूल्य की है तो अंतरण पंजीकरण द्वारा

होना चाहिए।