पुनरीक्षण अधिकारिता - Page 109

92 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

कब्जे में भूमि पर एक अधिकार है, जो कब्जे के लिए भावी अधिकार है

या एक अन्य के कब्जे में भूमि को किसी विशेष प्रयोजन के लिए प्रयोग

करने के लिए अधिकार। अर्थात् एक युक्तियाधिकार।

( iv ) मूर्त एवं अमूर्त के बीच संविदा, उसकी संपदा जो अभूमि मूर्त पर काबिज

और उस व्यक्ति की संपदा की बीच संविदा है जो एक अमूर्त वस्तु अर्थात्

मात्र अधिकार रखता है, अमूर्त किसी मूर्त वस्तु पर कब्जा नहीं रखता। ( v ) मूर्त वस्तु होने के लिए वह निश्चित वास्तविक प्रदान करने योग्य हो।

सुलेमान सी.जे. 50 इलाहाबाद 986 10. कब्जा परिदान करने का अर्थ

(i) परिदान तब घटित होता है जब विक्रेता क्रेता या ऐसे अन्य व्यक्ति को

जिसे वह निर्देशित करता है, संपत्ति का कब्जा देता है।

(ii) परिदान वह कृत्य है जो क्रेता को संपत्ति पर काबिज बना देता है।

(iii) कब्जा किसका होता है? प्रश्न अनुत्तरित रहता है। क्या वह वास्तविक

कब्जा है? या क्या वह प्रतीकात्मक कब्जा है?

(iv) एक दृष्टिकोण यह है कि चूंकि केवल प्रत्यक्ष संपत्ति का कब्जा प्रदान

करना निर्धारित है जो कि विधान मंडल का आशय था ही वास्तविक

कब्जा है।

(v) दूसरा दृष्टिकोण है कि यह सामान्य एवं व्यापक अर्थ में प्रयोग किया

जाता है क्योंकि बहुसंख्यक मामलों में भूमि एक असामी के अधिकार

में होती है या क्रेता के और इसीलिए भौतिक परिदान असंभव है।

(vi) परवर्ती दृष्टिकोण सामान्यतः स्वीकृत दृष्टिकोण है, ताकि भौतिक

परिदान है जबकि स्वामी क्रेता को भूमि के ऐसे संबंध में रखता है

और उसको वास्तविक अधिभोगी के रूप में रखता है जैसा कि वह

स्वयं अधिभोग करता था।

II. स्वामित्व जब अंतरित होता है।

(i) स्वामित्व परिदान या पंजीकरण पर संक्रांत होता है।

(ii) पंजीकरण के संबंध में निम्नोक्त बिंदु ध्यान में रखने चाहिएः-

(अ) पंजीकरण एक बार प्रभावी हो जाने पर, हक निष्पादन के दिनांक

से ही संबद्ध हो जाता है।

(ब) पंजीकृत विलेख किसी दूसरे विलेख से जो पंजीकृत भले ही पूर्वतर

हो किन्तु निष्पादित बाद में हो, विफल नहीं किया जा सकता।

(स) अन्तरण लंबित वाद के अधीन नहीं होगा यदि निष्पादन वाद के

पूर्व हुआ था किंतु पंजीकरण वाद के बाद में।