पुनरीक्षण अधिकारिता - Page 110

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(द) यद्यपि यह सत्य है कि संपत्ति अंतरित नहीं होती अर्थात् जब तक

पंजीकरण प्रभावी नहीं होता स्वामित्व अंतरित नहीं होता है, यह

कहना सत्य नहीं है कि संपत्ति जैसे ही विलेख पंजीकृत हो जाता

है वैसे ही अंतरित हो जाती है, क्योंकि पक्षों की अभीच्छा ही सही

कसौटी है।

III. धारा 55 (3) - हक विलेखों का परिदान करना

  1. हक विलेख संपदा के उपसाधन है। वे बिना नाम ही हस्तांतरण के साथ

अंतरित होते हैं।

  1. इसमें सभी विलेख संपत्ति संबंधित कब्जे में हस्तांतरित होने के साथ ही

अधिकार में जाते हैं।

  1. हक प्रदान करने के दायितव में उनको उपलब्ध करने के व्यय को वहन

करना भी शामिल है।

  1. हक विलेख एवं काबूलियत संपत्ति के उपसाधन हक विलेख हैं।

  2. समकक्षी पट्टठ्ठे प्रदान करने का कर्त्तव्य हस्तांतरण की पूर्णता पर निर्भर नहीं

करता। यह कर्त्तव्य तब तक उद्भूत नहीं होता जब तक कि मूल्य अदा नहीं

कर दिया जाता।

अपवादः-

(i) जब विक्रेता विलेखों में समाहित संपत्ति के अंश अपने पास रखता है, वह विलेखों को रोके रख सकता है, किन्तु वह उनकी सुरक्षित अभिरक्षा के लिए और जब अपेक्षित हो तो उन्हें प्रस्तुत करने या सत्य प्रतिलिपि देने के लिए एक बाध्यता के अधीन है।

(ii) जब संपत्ति विभिन्न भागों में बेची जाती है - सबसे बड़े भाग का क्रेता विलेखों के लिए हकदार है - उपरोक्त जैसे दायित्वों के अधीन।

एक स्पष्ट समझौते द्वारा, वह सबसे बड़े भाग अर्थात् क्षेत्रफल के क्रेता को दिया जा सकता है।

  1. उपधारा यह व्यक्त नहीं करती कि यदि विक्रय विभिन्न समयों पर किए गए हैं तो क्या होगा।

क्रेता के दायित्व

हस्तांतरित से पूर्व

  1. धारा 55 (5) (अ) - भौतिक मूल्य बढ़ाने वाली संपत्ति में क्रेता के हित से संबंधित तथ्यों का प्रकटीकरण

  2. हरेक क्रेता बाध्य है और सद्भाव बरतने के लिए आबद्ध है, उन सबमें जो

वह संविदा के संबंध में कहता है या करता है और सभी धोखों से, चाहे