94 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
सत्य को दबाकर या असत्यता का सुझाव देकर उसे अलग रहना है।
- किन्तु फिर भी जैसे विक्रेता अप्रकट दोषों को प्रकट करने के लिए हैं, क्रेता
अप्रकट लाभों को प्रकट करने के अधीन नहीं है।
- हक के मामले इस नियम के अपवाद हैं। यद्यपि विक्रेता का हक
साधारणतः उसके संज्ञान में अनन्य विषय है, तथापि ऐसे मामले हो सकते
हैं जहां क्रेता को वह जानकारी है जो विक्रेता के पास नहीं है। ऐसे मामले
में वह उसका अनुचित उपयोग न करे।
उदाहरण 1 - समर्स बनाम गिफ्रिथ्स
एक वृद्ध महिला ने संपत्ति यह विश्वास करते हुए कि उसका हक उस पर ठीक नहीं बनता है कम मूल्य पर बेची, जबकि क्रेता जानता था कि वह उसे ठीक कर सकती थी। विक्रय निरस्त कर दिया गया।
उदाहरण 2 - एलार्ड बनाम लेंडॅफ (लार्ड)
पट्टठ्ठेदार ने, पुराने पट्टठ्ठे के एक समर्पण को यह तथ्य छिपाते हुए कि वह व्यक्ति जिसके जीवन पर पुराना पट्टठ्ठा निर्भर करता था अपनी मृत्यु शैय्या पर था, पट्टठ्ठे का नवीनीकरण करा लिया।
2. धारा 55 (6) - मूल्य अदा करना
- क्रेता उस संपूर्ण हित के जो उसने खरीदा है स्वयं को पूर्णतया हस्तांतरित
होने के सिवाए मूल्य अदा करने के लिए बाध्य नहीं है।
- यदि संपत्ति सभी अधिभारों से मुक्त बेची जाती है, और ये हस्तांतरण के
समय उन्मोचित नहीं किए जाते हैं तो, क्रेता मूल्य अदा करने को बाध्य नहीं
है।
- अधिभारों से मुक्त हो जाने के लिए उसके पास उपचार हैंः-
(i) विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम की धारा 18 (ग) के अधीन विक्रेता को उनका उन्मोचन करने को बाध्य करना।
(ii) वह उसे स्वयं उन्मोचित कर सकता है, और उस धन को क्रय-धन से मुजराई कर सकता है।
(iii) विक्रेता के विरुद्ध पश्चात्वर्ती वाद के द्वारा वसूल कर सकता है।
- संपत्ति पर - धारा 55 (4) (ब) द्वारा अधिरोपित दायित्व से पृथक यह
उपधारा क्रेता पर एक वैयक्तिक दायित्व डालती है - 52 इलाहाबाद 901
क्रेता के दायित्व
II. हस्तांतरण के पश्चात्
1. धारा 55 (5) (ग) हानि आदि को वहन करना