क्रेता एवं विक्रेता के अधिकार - Page 112

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  1. धारा 55 (1) (ग) के अधीन विक्रेता को संविदा एवं हस्तांतरण के मध्य हुई

हानि को वहन करना है।

  1. हस्तांतरण के बाद क्रेता मालिक है और संपत्ति उसकी जोखिम पर है। अतः उसे

ही क्षति वहन करनी पड़ेगी।

  1. यह ‘इंग्लिश विधि’ से भिन्न है, जिसके अधीन विक्रय की संविदा एक साम्यापूर्ण

संपदा है और उसके साथ ही हानि या विनाश के दायित्व को हस्तांतरित करता

है।

  1. विक्रेता क्षय के लिए उत्तरदायी है और यदि विक्रेता ने संपत्ति का बीमा करा दिया

है तो क्रेता उसको उसके पुनः स्थापन के लिए आवेदन करने को बाध्य कर

सकता है।

2. धारा 55 (5) (घ) - देयों को अदा करना

  1. हस्तांतरण से पूर्व यह दायित्व विक्रेता का होता है - धारा 55 (1) (छ)

हस्तांतरण के पश्चात् यह क्रेता का हो जाता है - लोक शुल्क किराया, ब्याज

एवं विल्लंगम।

  1. दायित्व विधिक है और मात्र संविदा आधारित नहीं है, इसीलिए, एक अवयस्क

विक्रेता, जिसकी ओर से संपत्ति बेची जाती है, पर भी बाध्य करते हैं। 46 मद्रास

एल.जे. 464

  1. यदि संपत्ति विल्लंगमों से मुक्त बेची जाती है तो, विक्रेता को उसे निश्चित ही

उन्मोचित करना चाहिए। यदि विल्लंगमों के अधीन बेची जाती है, तो क्रेता

द्वारा विल्लगमों पर विक्रयों तक का ब्याज अदा किया जाना चाहिए। - 26 बम्बई

एस.आर. 942

क्रेता एवं विक्रेता के अधिकार

विक्रेता के अधिकार

I. हस्तांतरण के पूर्व

1. धारा 55(4) (अ) - किराया एवं लाभ लेना

  1. हस्तांतरण तक विक्रेता मालिक बना रहता है। अतः उसका संपत्ति के किरायों एवं

लाभों को लेने का अधिकार है।

II. हस्तांतरण के पश्चात्

1. धारा 55(4) (ब) - असंदत्त मूल्य के लिए संपत्ति पर भार का दावा करना।

  1. यदि विक्रय हस्तांतरण द्वारा पूर्ण हो जाता है और मूल्य या उसका कोई भाग अदा

नहीं हुआ है तो इस उपधारा के अधीन विक्रेता मूल्य या शेष के लिए भार का