क्रेता एवं विक्रेता के अधिकार - Page 114

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क्रेता के अधिकार

1. हस्तांतरण के पूर्व

  1. धारा 55 (6) (ब) - हस्तांतरण से पूर्व अदा किए गए क्रय धन के लिए संपत्ति पर भार का दावा करना

  2. खंड की शब्दावली से कोई अर्थ नहीं निकलता। यह दो भागों में है। यदि उपखंड फ्जब तक वह अनुचित रूप से परिदान से इंकार नहीं करता हैय् जो नकारात्मक रखा गया है, को सकारात्मक रख दिया जाए तो वह होगा फ्यदि वह उचित रूप से इंकार कर देता हैय् तब दोनों खंडों में कोई अंतर नहीं है।

  3. किन्तु दोनों भागों के बीच के अंतर हैं, जो सबूत के भार से पैदा होने वाले अंतर हैं। प्रथम भाग के अधीन, क्रेता कतिपय अधिकारों का हकदार है, जिन्हें वह प्रवर्तित करा सकता है जब तक कि वह ‘‘अनुचित रूप में परिदान को अस्वीकार नहीं करता हैय् जिसका अभिप्राय है कि उसका उन अधिकारों को खो देना है, यदि विक्रेता सिद्ध करता है कि वह क्रेता, परिदान को प्राप्त करने से अनुचित रूप से मना कर चुका है।

खंड के द्वितीय भाग में क्रेता कतिपय अतिरिक्त अधिकार पाता है, जिनका वह दावा भी कर सकता है केवल तब जब वह दिखला दे कि फ्उसने उचित रूप से परिदान लेना मना किया है’’ और यह दिखलाने का भार उसी पर होगा।

  1. इस खंड के अधीन क्रेता को तीन बातों के लिए भार का अधिकार होता हैः-

(i) उचित ढंग से अदा किए गए क्रय-धन के लिए,

(ii) बयाना यदि कोई है, के लिए,

(iii) उसे दिलवाए गए खर्च के लिए।

4. अदा किए गए क्रय-धन के लिए भार

(1) यह भार त्योंही शुरू हो जाता है ज्योंही क्रेता क्रय-धन का कोई भाग अदा कर देता है।

(2) क्रय धन के लिए भार तभी विलुप्त हो जाता है, जब विक्रेता यह सिद्ध कर दे कि क्रेता अनुचित रूप से परिदान लेने के लिए मना कर चुका है। सबूत-भार विक्रेता पर है।

  1. बयान एवं खर्च के लिए भार।

(1) इन दोनों के संबंध में भार की संभावना है। किन्तु यह संभावना तभी कार्यान्वित होगी जब क्रेता सिद्ध कर दे कि उसने उचित रूप से परिदान लेना मना किया है। सबूत का भार क्रेता पर है।

6. बयाना एवं क्रय-धन की आंशिक अदायगी

(1) बयाना की बावत भार के बारे में जो ऊपर व्यक्त किया गया है वह तभी लागू