98 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
होता है जब अदाकृत धन बयाना के रूप में अदा किया जाता है।
(2) क्रेता द्वारा हस्तांतरण से पूर्व अदा किया गया धन दो प्रयोजनों में काम आता हैः
(i) यह क्रय-धन की आंशिक अदायगी में जाता है, जिसके लिए इसे जमा किया जाता है।
(ii) यह संविदा की संपन्नता की प्रतिभूति है। परवर्ती दशा में यह बयाना है। पूर्ववर्ती दशा में यह किश्त है।
(3) यह भेद महत्त्वपूर्ण है क्योंकि भार होगा या वैयक्तिक दायित्व होगा या नहीं होगा, इस पर निर्भर करेगा कि क्या दिया गया धन किश्त है या बयाना।
(i) यदि बयाना है, तो कोई भार नहीं है (सिवाए एक क्रेता की दशा में जो सिद्ध कर दे कि वह उचित रूप से परिदान लेना मना कर चुका है, बयाना पूर्णतः लुप्त होता है एवं न केवल कोई भार नहीं है वरन् कोई वैयक्तिक दायित्व भी नहीं है।
(ii) यदि वह आंशिक भुगतान है - तो भार है, जब तक कि विक्रेता यह दर्शा दे कि क्रेता ने अनुचित रूप से परिदान लेना मना कर दिया है। आंशिक भुगतान कभी पूर्णतः लुप्त नहीं होता है। यदि वह भार बनाने में असफल रहता है, तो यह विक्रेता के वैयक्तिक दायित्व के रूप में बना रहता है।
(4) क्या यह आंशिक अदायगी है या बयाना, यह संविदा या आशय का विषय है।
क्रेता का भार विक्रेता एवं उसके अधीन सभी दावा करने वालों के विरुद्ध प्रवर्तित किया जा सकता है।
क्रेता अपना भार खो देता हैः-
(i) अपने स्वयं के पश्चात्वर्ती व्यतिक्रम से।
(ii) उसके अनुचित रूप से परिदान लेने से मना करके।
(2) बयाना राशि - बयाना के मूल में दो प्रयोजन हैंः-
(i) यह क्रय धन के आंशिक भुगतान में जाती है।
(ii) वह संविदा के अनुपालन की प्रतिभूति है। यदि संविदा पूर्ण हो जाती है, तो यह क्रय धन का अंश हो जाती है। यदि संविदा क्रेता के दोष या असफलता के कारण टूट जाती है, तो यह समपहरणित हो जाती है।
II. हस्तांतरण के पश्चात्
धारा 55(6) (अ) - संवृद्धि का दावा करना।
- यह ऐसा ही होना चिहए, क्योंकि हस्तांतरण के पश्चात् वही मालिक है।
(पृष्ठ खाली छूटा - संपादक)
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