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मूलधन एवं ब्याज के सभी दावों से मुक्त अ को वापस मिल जाने चाहिए।
अभिनिर्धारित हुआ, बंधक नहीं है।
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संक्रामणों के अन्य रूपों से बंधक की तुलना
बंधक और विक्रय
- विक्रय धारा 54 में परिभाषित है - यह मूल्य के लिए स्वामित्व का अंतरण है।
मूल्य एक ऋण नहीं है और अंतरण हित का एक अंतरण नहीं है वरन् स्वामित्व
का पूर्ण अंतरण है।
- बंधक में अदा धन एक ऋण है और अंतरण केवल हित का अंतरण है।
- विक्रय के संविदा-भंग में, अधिकार विक्रेता एवं क्रेता के अधिकार हैं जबकि
संविदा बंधक का संविदा है तो अधिकार बंधककर्ता एवं बंधकी के होते हैं। 4. विक्रय में, संपत्ति पूर्णतः अंतरित की जाती है। बंधक में संपत्ति, ऋण की वापसी
के लिए केवल एक प्रतिभूति के रूप में कार्य करती है।
बंधक और अन्य प्रकार की प्रतिभूतियां
- प्रतिभूतियां चार प्रकार की होती हैं (1) बंधक, (2) गिरवी, (3) धारण अधिकार
और (4) आडमान या भार।
बंधक एवं अन्य प्रकार की प्रतिभूतियों के मध्य अन्तर को जानना महत्त्वपूर्ण है।
1. बंधक एवं गिरवी
- ऋण चुकाने में या वचन के पालन में प्रतिभूति के रूप में माल का उपनिधान
गिरवी कहलाता है - धारा 172, भारतीय संविदा अधिनियम।
- बंधक में, संपत्ति में सामान्य स्वामित्व बंधकी को जाता है और बंधककर्त्ता का
केवल मोचन का अधिकार होता है। गिरवी में केवल एक विशेषित या विशेष
संपत्ति गिरवीदार को जाती है, सामान्य स्वामित्व गिरवीकर्ता के पास रहता है। 3. निक्षेपी गिरवीदान को गिरवी संपत्ति के कब्जे का परिदान आवश्यक है। किन्तु
कब्जे का परिदान एक बंधक के लिए आवश्यक नहीं है।
- संपत्ति जो एक बार गिरवी की जाती है दूसरी बार गिरवी नहीं की जा सकती,
क्योंकि, दूसरे गिरवीदार के लिए कब्जा नहीं किया जा सकता है। जबकि संपत्ति
जो एक बार एक व्यक्ति को बंधक कर दी जाती है, बाद मे दूसरों को बंधक
की जा सकती है।
- गिरवी केवल वैयक्तिक संपत्ति की हो सकती है। बंधक दोनों, वैयक्तिक एवं