102 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
वास्तविक संपत्ति हो सकती है।
बंधक और धारणाधिकार
- धारणाधिकार प्रतिभूति का एक प्रकार है जो विधि के प्रवर्तन द्वारा सृजित किया
जाता है। धारणाधिकार विधि द्वारा न कि कतिपय मांगों के पूर्ण होने तक एक दूसरे
से संबंधित संपत्ति के कब्जे को रोके रखने की संविदा द्वारा सृजित एक अधिकार
है।
- धारणाधिकार विषयक विधि भारतीय विधानमंडल की बहुत सी संविधिओं में
बिखरी है। अर्थात् संविधान अधिनियम, धारा 170-सामान्य-171-बेंकर्स, वादेक्षक
आदि, 221-अभिकर्त्ता का धारणाधिकार वस्तु-विक्रय-47, असंदत्त विक्रेता
धारणाधिकार। संपत्ति अंतरण 554-55 (6) विक्रेता एवं क्रेता का धारणाधिकार। 3. धारणाधिकार सामान्य स्वामित्व सृजित नहीं करता जैसे कि बंधक करता है, यहां
तक कि विशेषित संपत्ति नहीं, जैसे गिरवी में - केवल कब्जा रोके रखने का
अधिकार।
- बंधकी एवं गिरवीदार दोनो बेच सकते हैंः धारणाधिकारी नहीं बेच सकता।
बंधक एवं भार
- भार धारा 100 में परिभाषित है। भार में दो तत्त्व हैंः
(1) इसमें धन का दायित्व होता है।
(2) उस धनीय दायित्व के उन्मोचन के लिए अचल संपत्ति प्रतिभूति बनाई
जाती है।
- बंधक में तीन तत्त्व होते हैंः
(i) धनीय दायित्व है।
(ii) उस धनीय दायित्व के उन्मोचन के लिए अचल संपत्ति को प्रतिभूति बनाया जाता है।
(iii) लेनदार के पक्ष में उस संपत्ति में एक हित का हस्तांतरण है।
- भार में हित का अंतरण नहीं होता। इसमें केवल भार या बोझ होता है।
35 कलकत्ता 837, 13 लाहौर, 660 टी.बी.
35 कलकत्ता 985
- बंधक एवं भार के मध्य अंतर सारवान है।
(1) बंधकी बंधकित संपत्ति का बध्ांनकर्त्ता से किसी भी अंतरिती के हाथों
में, पीछा कर सकता है। जबकि भार अंतरितों के विरुद्ध सूचना के साथ
प्रदर्शित किया जा सकता है।