संक्रामणों के अन्य रूपों से बंधक की तुलना बंधक और विक्रय - Page 121

104 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

को नकार सकती है।

(5) सादा बंधक में, ऋण के लिए हमेशा प्रतिभूति दी जाती है। ऋण प्रतिभूति

ऋण होता है। किन्तु प्रतिभूति की प्रकृति एवं शर्तें बंधककर्ता के वैयक्तिक

दायित्व को नकारात्मक निश्चित नहीं करती। अदा करने को एक वैयक्तिक

समझौता अंतर्निहित है और प्रत्येक सादा बंधक का आवश्यक अंग है।

निर्णय-22 इलाहाबाद 453(461)_ 29, मद्रास 491_ 30 इलाहाबाद 388

(6) ऐसी प्रसंविदा के अभाव में, प्रतिभूति भार मात्र होगी।

निर्णय-42 इलाहाबाद 158 (164) = 46 आई.ए. 228, 52 इलाहाबाद 901

II. संपत्ति को बिकवाने का अधिकार

  1. यह एक बंधित अधिकार है यद्यपि वह न्यायालय के दखल से ही प्रवर्तित किया जा सकता है, जैसे कि बिकवाने का कारण शब्दों से इंगित होता है।

  2. इस अधिकार का अंतरण अभिव्यक्त या विवक्षित हो सकता है।

(II) सशर्त विक्रय द्वारा बंधक

  1. अभिलक्षण

(1) अंतरण विक्रय द्वारा है। यह स्वामित्व का अंतरण है।

(2) विक्रय एवं सशर्त विक्रय द्वारा बंधक में अंतर यह है कि विक्रय में अंतरण

पूर्ण होता है जबकि सशर्त विक्रय द्वारा बंधक में, यह पूर्ण नहीं है, वरन् एक

शर्त के अधीन होता है।

शर्त तीन प्रकार की हो सकती हैः-

(i) यह कि बंधक-धन एक निश्चित दिन पर अदा न करने पर विक्रय पूर्ण हो जाता है।

(ii) यह कि ऐसी अदायगी किए जाने पर विक्रय शून्य हो जाएगा।

(iii) यह कि ऐसी अदायगी किए जाने पर, क्रेता ऐसी संपत्ति को विक्रेता को हस्तांतरित कर देगा।

  1. सशर्त विक्रय द्वारा बंधक एवं पुनः क्रय की शर्त के साथ विक्रय में बहुत ही निकट की समरूपता है। दोनों दशाओं में, प्रति हस्तांतरण का अधिकार हैः-

(1) किन्तु ये निबंधनों की प्रकृति में भिन्न है, जिन पर प्रति हस्तांतरण का

अधिकार प्रयुक्त किया जा सकता है।

(2) यदि वह प्रतिक्रय की प्रति शर्त के साथ विक्रय है तबः-

(i) अधिकार वैयक्तिक है एवं हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।

(ii) अधिकार, प्रतिक्रय को शर्त द्वारा लिखित निबंधों के साथ सुनिश्चित अनुपालन करने पर प्रवर्तित किया जा सकता है।

निर्णयः- 10 कलकत्ता 30, 6 इलाहाबाद 37, 21 बम्बई 528