107
(iii) किराया एवं लाभों को प्राप्त करने का प्राधिकार और उसको बंधक-धन की अदायगी में या ब्याज के बदले में विनियोग करना।
टिप्पणी - अदा करने का कोई वैयक्तिक दायित्व नहीं।
(IV) अंग्रेजी बंधक
1. लक्षण
(i) एक निश्चित दिन तक बंधनकर्त्ता द्वारा प्रतिसंदाय करने की वैयक्तिक बाध्यता है।
(ii) बंधकी का अंतरण पूर्ण है।
(iii) अंतरण परंतुक के अधीन है कि बंधकी अदायगी पर संपत्ति को वापस करेगा।
- यह शर्त बंधक के काफी समरूप है।
अंतर
- अंग्रेजी बंधक में विक्रय एकांतिक पूर्ण होता है जबकि सशर्त विक्रय द्वारा बंधक में विक्रय दृश्यमान होता है।
वह बंधक कैसे हो सकता है यदि विक्रय पूर्ण है? यह बंधक की परिभाषा के प्रतिकूल प्रतीत होता है, जो हित का अंतरण है।
व्यवहार में अंतर का अर्थ हैः कि- अंग्रेजी बंधक में बंधकी तुरंत कब्जे का हकदार होता है, जबकि सशर्त विक्रय द्वारा बंधक की दशा में, कब्जा करने का अधिकार बंधक के अनुबंधों पर निर्भर करता है।
- अंग्रेजी बंधक में, अदा करना वैयक्तिक दायित्व है। सशर्त बंधक में ऐसा कोई अधिकार नहीं होता।
हक-विलेख के निक्षेप द्वारा बंधक की अपेक्षाएं
ऋण
- ऋण की परिभाषा अब देय किन्तु भविष्य में संदेय एवं वाद द्वारा वसूलनीय धनराशि के रूप में की गई है। -
(1922) 2 के.बी. 509 (617)
टिप्पणी - संविधि द्वारा देय ऋण एवं संविदा द्वारा देय ऋण के अंतर के बारे में (1922) 2 के.बी. 37 जब ऋण एक सांविधिक ऋण है तो धन को वसूलनीय बनाने की दृष्टि से अदा करने का वचन देने की कोई आवश्यकता नहीं है।
- ऋण वर्तमान ऋण या भावी ऋण हो सकता है। निक्षेप वर्तमान एवं भावी अग्रिमों को अदा करने को हो सकती है -
50 आई.ए. 283_ 17 इलाहाबाद 252_ 25 कलकत्ता 611
- ऋण सामान्य शेष हो सकता है जो एक खाते पर देय हो