108 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
2 मद्रास 239 पी.सी.
11 हक विलेखों का निक्षेप।
(i) हक विलेख
II . इंग्लैंड में यह अभिनिर्धारित किया गया कि यह पर्याप्त है यदि सद्भावपूर्वक जमा किए गए विलेख संपत्ति से संबंधित हैं या हक के सारवान साक्ष्य हैं, और कि यह आवश्यक नहीं है कि सभी विलेख जमा किए जाने चाहिए।
(1872) सी.एच.एपीपी. 155 2. इन मामलों का भारत में अनुसरण किया गया है।
59 कलकत्ता 781 3. किन्तु पृष्ठ सी.एफ।। रंगून 239 एफ.बी. में अभिनिर्धारित किया गया कि न
दस्तावेज केवल संपत्ति से संबंधित हो, वरन् ऐसे भी हों कि जमाकर्ता में प्रथम
दृष्टि या प्रत्यक्ष हक को दर्शाते हों।
- यदि विलेखों में हक का कोई प्रकार नहीं दर्शाया जाता है तो, कोई बंधक नहीं
बनता है - कर की रसीद-नक्शा/योजना-हक/विलेख नहीं।
- यदि विलेख लुप्त है तो प्रतिलिपियां जमा की जा सकती हैं।
(ii) यदि बंधक की युक्ति से प्रतिलिपियां पहले ही जमा कर दी गई हैं तो वे मौखिक करार से, आगे और अग्रिम धन के लिए प्रतिभूति बनाई जा सकती है। यह आवश्यक नहीं है कि वे वापस दी जाए और पुनः जमा कराई जाएं।
17 इलाहाबाद 252, 25 कलकत्ता 611
III. आशय
- यह आशय कि हक-विलेख ऋण के लिए प्रतिभूति हों, संव्यवहार का सार
है।
- इस रीति के बारे में जिससे कब्जा पैदा हुआ था बिना साक्ष्य, के कब्जा मात्र
पर्याप्त नहीं है, ताकि एक संविदा का अनुमान किया जा सके।
231 आई.ए. 106, 38 बम्बई 372
I. रंगून, 545
- यदि पक्षों के विचार को आसन्न मानकर विधिक बंधक तैयार करना है और
यदि हक-विलेख केवल इसी प्रयोजन के लिए जमा किए जाते हैं, तो निक्षेप
साम्यिक बंधक का सृजन नहीं करता है।
- तथापि निक्षेप, एक विधिक बंधकपत्र की तैयारियों के प्रयोजन के लिए है,
वहीं एक त्वरित प्रतिभूति देने का आशय भी हो सकता है, जिस विषय में
निक्षेप एक साम्यिक बंधक सृजित करता है।
- प्रश्न है क्या ऋण से योगित कब्जा मात्र अनुमान उत्पन्न नहीं करता है कि