110 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
- भोगा बंधक और सशर्त विक्रय द्वारा बंधक में, अदा करने का कोई वैयक्तिक दायित्व नहीं है।
वह क्या है जो सभी बंधकों में सामान्य है?
बंधक, एक ऋण के प्रतिसंदाय के लिए विशिष्ट अचल संपत्ति में हित का अंतरण है।
अतः ऋण की विद्यमानता सामान्य लक्षण है।
कहा जाता है कि यहां ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि सशर्त बंधक और भोगा बंधक में अदा करने की कोई वैयक्तिक प्रसंविदा नहीं है।
इसका उत्तर है, ऋण का ऋण होना समाप्त नहीं होता है। ऋण के लिए वाद का उपचार विद्यमान नहीं है। ऋण की वसूली के लिए उपचार संव्यवहार के ऋण का संव्यवहार समाप्त हुए बिना भिन्न हो सकता है।
साधारण भूमि के बंधक को दो भिन्न पहलुओं से देखा जा सकता हैः
(1) ऋण चुकाने के लिए ऋणी द्वारा वचन के रूप में माना गया यह एक वैयक्तिक दायित्व सृजन करने वाली संविदा है।
(2) यह एक हस्तांतरण भी है क्योंकि यह महाजन को उसको बंधकित संपत्ति में वास्तविक अधिकार देता है।
इस युगल पहलू से बहुत से प्रश्न पैदा होते हैं।
प्रश्न 1 - विदेश में स्थित भूमि के बंधक की वैधता किस विधि के द्वारा नियमित होगी?
यह अब तय है कि यह स्थानीय विधि के द्वारा विनियमित किया जाता है और वास्तविक हस्तांतरण एवं मात्र निष्पादय संविदा के मध्य कोई भेद मान्य नहीं है।
प्रश्न 2 - प्रतिभूत ऋण का अवस्थान क्या है - क्या ऋण जहां, ऋणी रहता है उस देश में अवस्थित माना जाना है या वहां जहां भूमि, जिस पर यह प्राप्त किया जाता है, अवस्थित है?
प्रीवी काउंसिल कहती है फ्यह कहना बेकार है कि ऋण एक प्रतिभूति से आच्छादित उसी अवस्था में एक ऋणी के वैयक्तिक दायित्व पर पूर्णतः निर्भर करने वाले एक व्यक्ति के साथ है।
III. विधिमान्य बंधक की अपेक्षाएं
यह निम्न विषयों पर विचार करने की अपेक्षा रखता हैः-
(i) औपचारिकताएं जिनके साथ बंधक निष्पादित किया जाए।
(ii) बंधक की उपयुक्त विषय-वस्तु।
(iii) देने एवं बंधक स्वीकार करने की क्षमता।