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(iv) बंधक-विलेख की विषय-वस्तु।
1. वे औपचारिकताएं जिनके साथ यह निष्पादित किया जाए।
धारा 59
हक विलेखों की निक्षेप द्वारा बंधक की दशा के सिवाए हर एक बंधक मूलधन के रूप में 100/- रु. या अधिक प्राप्त करने पर, संपत्ति अंतरण अधिनियम के अधीन बंधनकर्ता द्वारा हस्ताक्षरित एवं कम से कम दो गवाहों द्वारा साक्ष्यांकित एक पंजीकृत प्रपत्र द्वारा प्रभावी होता है।
जहां मूलधन 100/- रु. से कम है वहां बंधक, या तो ऐसे प्रपत्र द्वारा या सादा बंधक की दशा के सिवाए बंधकित संपत्ति के कब्जे के परिदान द्वारा सृजित किया जा सकता है।
यदि मूलधन 100/- रु. से ऊपर है तो बंधक का संव्यवहार निश्चित रूप से लिखित में होना चाहिए अर्थात् यह निश्चित रूप से एक विलेख द्वारा होना चाहिए एवं विलेख आवश्यक होना चाहिएः-
(1) बंधककर्ता के द्वारा हस्ताक्षरित।
(2) कम से कम दो साक्षियों के द्वारा साक्ष्यांकित।
(3) पंजीकृत।
- यदि यह 100/- रु. से कम है तो लिखना आवश्यक नहीं है। निम्नलिखित के संबंध में मौखिक करार पर्याप्त है,
(1) सादा बंधक।
(2) सशर्त बंधक।
(3) अंग्रेजी बंधक।
(4) भोग बंधक।
मौखिक करार धन कब्जे का अंतरण।
- हमको केवल (उन) बंधकों का विचार करना है जहां मूलधन 100/- रु. से ऊपर है।
(1) हस्ताक्षर
साधारण खंड अधिनियम, 1897, धारा 3 (52)
हस्ताक्षर प्रतीकों के साधनों से या प्रतिकृति द्वारा किए जा सकते हैं। 25 कलकत्ता 911 ऐसा व्यक्ति नौकरों के द्वारा प्रयुक्त नाम की मुहर रखने वाला।
वह एक अशिक्षित व्यक्ति का चिह्न हो सकता है। 41 बम्बई 384 करार का चिह्न।
किन्तु एक शिक्षित व्यक्ति चिह्न बनाकर हस्ताक्षर नहीं कर सकता। अपराध स्वीकरण हस्ताक्षरित नहीं किया, अपराधी शिक्षित था।।