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हाथ को देखा जब उसने हस्ताक्षर किए और उन्होंने निष्पादकों के चेहरे को नहीं देखा, उनको बोलते सुना और उनकी आवाज़ों को पहचानाः-
निर्णीत हुआ कि विलेख संपत्ति अंतरण अधिनियम के अनुसार सम्यकतः अनुप्रमाणित था।
- अब विधि परिवर्तित और निष्पादक द्वारा अपने हस्ताक्षर की अभिस्वीकृति पर अनुप्रमाणित सही है - देखिए परिभाषा अनुप्रमाणित धारा 3, संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1926 में संशोधित।
(3) पंजीकृत
(पृष्ठ खाली छूटा - संपादक)
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(प्रारंभिक अंश प्राप्त नहीं हुआ - सं.) तुरंत प्रचलित करने के लिए यह आवश्यक नहीं है कि एक औपचारिक परिदान होना चाहिए या यहां तक कि दस्तावेज उस पक्ष के जो उसको निष्पादित करता है, कब्जे से बाहर हो जाना चाहिए।
दुष्टांत - एक्टसन बनाम स्कॉट (1833) 6 साइमन्स 31
कोई व्यक्ति दूसरे से संबंधित धनराशि पा लेने पर बिना किसी सूचना के, उसके साथ, उसके पक्ष में धनराशि के बदले एक बंधक निष्पादित करता है। बंधककर्ता ने विलेख को कई वर्षों तक अपनी अभिरक्षा में रोके रखा और तब एक दिवालिया के रूप में मर गया। उसकी मृत्यु के बाद वह अभिलेख उसके हक विलेख धारक एक तिजोरी में से खोज निकाला गया। यह दावा किया गया कि कोई बाध्यकर बंधक नहीं था, क्योंकि विलेख का परिदान नहीं किया गया था। किन्तु दावा इस आधार पर रद्द कर दिया जाता है कि यह दर्शाने को कोई साक्ष्य नहीं है कि विलेख का प्रवर्तन उसके निष्पादन के समय से आशयित नहीं था।
- इसमें एक विचार का होना प्रतीत होता है कि यदि विलेख दूसरे पक्ष को परिदान
किया जाता है तो यह निश्चितः तुरन्त प्रवर्तित होना चाहिए और इसके प्रवर्तन में
विधि की दृष्टि में विलम्ब नहीं किया जा सकता। किन्तु अब यह स्थापित हो गया
है कि साक्ष्य उस आचरण को दर्शाने के लिए स्वीकार्य है जिसमें विलेख किसी
व्यक्ति को प्रदत्त किया जाता है, यद्यपि वह स्वयं उसके अधीन लेने वाला पक्ष
है, अजनबी नहीं है।
(1897) 2 सी.एच. 608 7. जहां कोई लिखित प्रवर्तन तुरंत नहीं वरन् किसी शर्त के संपादन पर आता है वहां
यह एक प्रतिबंधालम्बित लेख कहलाता है, जिसका सामान्य अभिप्राय है निलंब
लेख या लेख जो जब तक एक पूर्ववर्ती शर्त पूरी नहीं की जाती है, प्रभावी नहीं
होता है।