संक्रामणों के अन्य रूपों से बंधक की तुलना बंधक और विक्रय - Page 132

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(i) यदि संपत्ति इतनी अशुद्धता से वर्णित की जाती है कि वह पहचानी नहीं जा सकती है।

18 कलकत्ता 556/4 ब

(ii) जबकि एक विलेख सर्किल में पंजीकृत किया जाता है जिसमें संपत्ति स्थित नहीं है।

29 कलकत्ता 654

(iii) जहां विलेख पंजीकरण के लिए उपयुक्त व्यक्ति के द्वारा प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो, बंधक विधिमान्य नहीं है।

औपचारिकताओं की विषय-वस्तु के संबंध में दो अन्य प्रश्नों पर विचार करना है।

1. क्या विलेख का निष्पादन बंधक को प्रभावी करने के लिए पर्याप्त है?

  1. यह कहने की आवश्यकता नहीं कि विलेख का निष्पादन मात्र आवश्यक नहीं है

यदि वह बाध्यकर सहमति के रूप में प्रवर्तित होना आशयित नहीं है। 2. यह आंग्ल विधि में इस नियम (सूत्र) द्वारा अभिव्यक्त है कि विलेख परिदत्त किया

गया हो।

  1. यह तब तक स्पष्ट नहीं हो सकता है जब तक कि कोई यह नहीं समझता कि

फ्परिदत्तय् का अभिप्राय क्या है, एक विलेख जो किसी तकनीकी कार्यवाही का

प्रतिनिधित्व नहीं करता है, के परिदान के संबंध में कुछ भी रहस्यमय नहीं है,

वरन् केवल इंगित करता है कि लिखत तुरंत प्रवर्तन में आ जाना है। 4. शेफर्ड अपनी कसौटी (टचस्टोन) में परिदान को अच्छे विलेख की अपेक्षाओं में

एक रूप में व्यक्त करता है और यह भी कहता है कि ज्यूरी के लिए यह एक

तथ्य का प्रश्न है।

निर्णय विधि

I. राज्य सचिव के विरुद्ध वाद

(1906) 1 के.बी. 613_ 5 लखनऊ 157, 37 मद्रास 55

II. राजा (क्राउन) की स्थिति

1920 ए.सी. 508, 1932 ए.सी. 28, 1929 ए.सी. 285, 8 अपी वाद (केसेज) 767, 8 एम.आई.ए. 500, 1930 अपी. वाद 501

III. परमसत्ता

(1792) 2 वी.ई.एस. 60, 13 एम.पी.सी.सी. 22 (1906) I के.बी. 613 ब्रिटिश भारत=धारा 3 (17) साधारण खंड अधिनियम 1897। समग्र ब्रिटिश भारत=अनुसूचित जिलों (क्षेत्रों) को आवेष्टित करता है।

52 मद्रास 1