संक्रामणों के अन्य रूपों से बंधक की तुलना बंधक और विक्रय - Page 134

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मृत्यु नहीं हुई है? नैसर्गिक मृत्यु नहीं हो सकती है, यद्यपि सिविल मृत्यु हो सकती

है।

दृष्टांतः-

संन्यासी - बौद्ध

जहां कोई व्यक्ति सभी सांसारिक परंपराओं को त्यागते हुए धार्मिक क्रम में प्रवेश करता है, उसका कर्म सिविल मृत्यु के समान है।

दृष्टांतः-

संन्यासी - मुल्ला पृ. 113

बौद्धभिक्षु - 7 रंगून 677 आई.बी.

  1. एक व्यक्ति जो सिविल दृष्टि से मृत है, संपत्ति अंतरण अधिनियम के प्रयोजन के

लिए मृतक नहीं है।

  1. जीवित जैसा कि धारा 299 आई.पी.सी. स्पष्टीकरण 3 में परिभाषित है, इंगित

करेगा कि उसके शरीर के किसी अंग को अवश्य समक्ष लाना ही चाहिए। किन्तु

हिन्दू विधि में गर्भस्थ पुत्र निश्चिततः जन्में हुए पुत्र के समान है - मुल्ला पृष्ठ

319। एक व्यक्ति हिन्दू विधि के प्रयोजन के लिए जीवित हो सकता है, संपत्ति

अंतरण अधिनियम के प्रयोजन के लिए नहीं।

16 मद्रास 76, 37 इलाहाबाद 162, 58 मद्रास 886 4. इसी प्रकार की स्थिति में एक व्यक्ति का एक अन्य मामला सिद्ध दोष का है।

चूंकि सिद्ध दोष आंग्ल विधि के अधीन संविदा नहीं कर सकता या संपत्ति का

निपटारा नहीं कर सकता बंधक पर धन उधार देने या उधार लेने का अधिकार

नहीं रखता है, किन्तु सिद्ध-दोष का प्रशासक सिद्ध-दोष की संपत्ति के किसी भी

भाग को बंधक कर सकता है।

सिद्ध-दोष धारा 6, समपहरण अधिनियम 33 एवं 34 विक.चा. 23, 1870 में परिभाषित है, जिसका अभिप्राय है कोई व्यक्ति जिसके विरुद्ध मृत्युदंड या कठोर श्रम कारावास किसी राजद्रोह या महापराध के आरोप पर इंग्लैंड वेल्स या आयरलैंड में सक्षम क्षेत्राधिकार के किसी न्यायालय में उद्घोषित या अभिलिखित किया गया हो।

  1. भारत में सिद्ध दोष की स्थिति के बारे में क्या है।

(पांडुलिपि में पृष्ठ खाली छूटा - संपादक)

व्यक्ति

  1. ‘व्यक्ति’ शब्द में साधारण खंड अधिनियम के अनुसार कोई कंपनी चाहे निगमित