है या नहीं, व्यक्तियों का संगम या निकाय भी शामिल है।
- व्यक्ति शब्द में फ्न्यायिक व्यक्तिय् भी शामिल हैं, जैसे एक निगम यह बहुत पहले
प्रतिपादित दृष्टिकोण था। किन्तु अब एक विशेष परंतुक के द्वारा जो संपत्ति अंतरण
अधिनियम में 1929 में धारा 5 में जोड़ा गया था, वह स्पष्ट कर दिया गया है। 3. एक निगम, जिसको भूमि अर्जित करने एवं रखने का अधिकार है, उसे बंधक
करने का भी अधिकार उस उद्देश्य के लिए है जिसके लिए वह सृजित किया गया
था। यहां तक कि आंग्ल विधि के अधीन गर्भस्थ शिशु पुत्र मात्र जीवित व्यक्ति
समझा जाता है।
सांविधिक निगमों के अधिकार सामान्यतः निगमन के कार्य द्वारा विनियमित किए
जाते हैं, किन्तु जहां निगम के प्रयोजनों के लिए उधार लेना आवश्यक है, वही
यह संपत्ति अंतरण अधिनियम द्वारा निषिद्ध नहीं किया जाता है, क्योंकि यह एक
फ्व्यक्तिय् है।
- हिन्दू विधि द्वारा मूर्ति को संपत्ति धारण करने वाले एक न्यायिक व्यक्ति के रूप
में मान्यता प्राप्त है।
किन्तु मूर्ति की संपत्ति का कब्जा एवं प्रबंधन शैबाइत (पुजारी) में निहित होता है। किंतु चूंकि स्वामित्व मूर्ति का होता है और चूंकि मूर्ति एक न्यायिक व्यक्ति एवं इसीलिए एक जीवित व्यक्ति है,यह बंधक का एक पक्ष हो सकती है।
संविदा की सामर्थ्य के संबंध में अपेक्षाएं
- यह धारा 7 में वर्णित है। धारा 7 के अधीन दो बातें आवश्यक हैंः-
(i) व्यक्ति संविदा के लिए सक्षम हो।
(ii) व्यक्ति हस्तांतरणीय संपत्ति का हकदार या हस्तांतरणीय संपत्ति का व्ययन करने के लिए प्राधिकृत हो।
(i) संविदा के लिए सक्षम
- धारा 4 व्यक्त करती है कि संपत्ति अंतरण के वे अध्याय एवं धाराएं जो संविदाओं
से संबंधित हैं, भारतीय संविदा अधिनियम के भाग माने जाएंगे। 2. अतः संविदा की सक्षमता से संविदा अधिनियम के अनुसार सक्षमता अभिप्रेत होनी
चाहिए।
धारा 11. प्रत्येक व्यक्ति जो विधि के अनुसार, जिसके वह अधीन है, वयस्कता की आयु का है, संविदा करने के लिए सक्षम है और जो स्वस्थचित्त है और किसी विधि