120 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
(ब) संपत्ति में हित जो स्वामी के लिए उपभोग में वैयक्तिक रूप से सीमित
है, अंतरित नहीं किया जा सकता।
- यह दर्शाता है कि चल संपत्ति का बंधक हो सकता है। संपत्ति अंतरण अधिनियम
में इसका उल्लेख नहीं है क्योंकि संविदा अधिनियम में इसका उल्लेख एक गिरवी
के रूप में है।
बंधक-विलेख की विषय-वस्तु
यह वांछनीय है कि बंधक-विलेख में कुछ निश्चित विवरण लिखे जाने चाहिए।
- ऋण या वचनबंध, जो प्रतिभूति की विषय-वस्तु है, विलेख में विशेष रूप से
उल्लिखित होनी चाहिए, अन्यथा बंधकर्त्ता एक ऋण को दूसरे में बदल सकता
है।
- अदायगी या अनुपालन के लिए समय निश्चित रूप से विलेख में विशेषतः
उल्लिखित होना चाहिए।
- विलेख में अदायगी प्रसंविदा भी होनी चाहिए, क्योंकि बंधकों के विभिन्न प्रकार
हैं जिनमें कोई ऋण विवक्षित नहीं होता।
- संपत्ति जो बंधक में दी जानी है पर्याप्ततः वर्णित होनी चाहिए। यह सत्य है, कि
संपत्ति के अभिज्ञान (पहचान) के प्रयोजन के लिए बाह्य साक्ष्य स्वीकार्य है, जहां
विवरण या तो अनिश्चित या वस्तुतः भ्रामक है।
प्रश्न - क्या बंधक एक व्यक्ति की संपत्ति पर सृजित किया जा सकता है, यदि ऐसी संपत्ति विशिष्टतः वर्णित नहीं की जाती है? क्या सामान्य बंधक वैध है।
प्रश्न - क्या समस्त संपत्ति की जो ऋणी के पास है, गिरवी बिना किसी आगे के विभेद के, हमारी विधि के अधीन बंधक का सृजन कर सकती है?
ऐसी लिखत जिसमें प्रतिभूति सृजित करने के लिए सुसंगत पर्याप्त शब्द है एवं ऐसी लिखत में जिसमें ऋणी मात्र सहमत होता है कि यदि धन चुकता नहीं होता है तो बाध्यताकारी ऋणी की समग्र संपत्ति से ऋण वसूल करने के लिए स्वतंत्र होगा, में अंतर अवश्य करना चाहिए।
बाद के मामले में, यदि वे अकेले रह जाते हैं, साहूकार को केवल उसके ऋणी की संपत्ति पर निष्पादन का भार डालने का साधारण अधिकार बाध्यताकारी को देते हैं और गिरवी का सृजन नहीं करते हैं।
मान लीजिए कि मामला प्रथम शीर्षक के अंतर्गत आनेवाला है, तो ऐसा आडमान एक बंधक बनाने के लिए ठीक है।
भारत में, ऐसी प्रतिभूतियों की वैधता इस आधार पर प्रश्नगत की गई है कि एक सामान्य आडमान कार्यान्वित किए जाने को बिल्कुल अनिश्चित है।
(1) यह कहा जाता है कि ऐसा आडमान इस सिद्धांत के विरुद्ध पाप करता है