भाग-2
बंधक के अधिकार एवं दायित्व
प्रस्तावना
- संपत्ति जो बंधक की विषय-वस्तु है, बंधककर्त्ता एवं बंधकी के अधिकारों के
अधीन होती है।
- यहां दो प्रश्न विचारणीय हैंः-
(i) बंधककर्त्ता एवं बंधकी के क्या अधिकार हैं?
(ii) उन अधिकारों की प्रकृति क्या है?
अधिकारों की प्रकृति क्या है?
- आंग्ल विधि विभाजित करती हैः- बंधककर्त्ता के हित को साम्यिक संपदा कहा
जाता है, जबकि बंधकी के हित को विधिक संपदा। भातीय विधि विधिक एवं
साम्यिक संपदा के बीच इस प्रभेद को मान्यता प्रदान नहीं करती है।
(1872) आई.ए.सली. 47 (71), 30 आई.ए. 238 2. यहां तक कि संविदा अधिनियम के अधीन भी यह भेद मान्य नहीं है।
58 आई.ए. 279 3. दोनों के विधिक अधिकार हैं - विधिक के विपरीत कुछ भी साम्यिक नहीं है।
II. आंग्ल विधि के अधीन बंधकी स्वामी होता है जबकि बंधककर्त्ता प्रति हस्तांतरण मात्र का अधिकार रखता है।
- भारतीय विधि के अधीन ठीक उल्टा है। बंधककर्त्ता स्वामी है और बंधकी केवल रि अबेना में अधिकार रखता है।
बंधककर्त्ता के अधिकार
बंधककर्त्ता के अधिकारों को तीन वर्गों में बांटा जा सकता है -
(i)) मोचन का अधिकार।
(ii) संपत्ति की व्यवस्था करने का अधिकार।