बंधककर्त्ता का व्यवस्था करने का अधिकार - Page 146

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  1. बंधककर्त्ता सादा बंधक में धन वापस करने के लिए स्वयं को आबद्ध करता है।
  2. सशर्त विक्रय द्वारा बंधक में वह कहता है - फ्यदि वह अदा करता है तो वह

अपनी संपत्ति की वापसी प्राप्त करेगा।य्

  1. भाग बंधक में यह विशेषित प्रसंविदा तक को भी करता है। अतः यह स्पष्ट है

कि एक बंधककर्त्ता एक साधारण बंधक में एक धन की डिक्री के लिए वाद कर

सकता है किन्तु अन्य प्रकार के बंधकों में नहीं। जब तक कि उस प्रभाव की एक

अभिव्यक्त प्रसंविदा नहीं है।

अपवाद

बंधककर्त्ता बंधककर्त्ता से धन की डिक्री के लिए वाद कर सकता है किन्तु वह एक हस्तांतरिती से, बंधककर्त्ता से या उसके विधिक प्रतिनिधि से धन की डिक्री के लिए वाद नहीं कर सकता है -

अन्य मामले जिनमें वह धन की डिक्री के लिए वाद कर सकता है।

  1. सामान्यतः बंधकी धन की डिक्री के लिए वाद कर सकता है जब बंधककर्त्ता द्व

ारा अदा करने के लिए वैयक्तिक प्रसंविदा है।

  1. ऐसे मामले हैं जहां बंधकी वाद कर सकता है यद्यपि अदा करने को वैयक्तिक

प्रसंविदा नहीं है।

धारा 68

(i) जहां किसी एक पक्ष के कार्य के फलस्वरूप नहीं वरन् आकस्मिक कारणों से जैसे कि आग, बाढ़, दैविक प्रकोप द्वारा संपत्ति पूर्णतः या आंशिकतः नष्ट हो जाती है या अपर्याप्त हो जाती है और बंधककर्त्ता अवसर दिए जाने पर दूसरी प्रतिभूति देने में असफल रहता है।

(ii) जहां बंधकी, बंधककर्त्ता के दोषपूर्ण आचरण द्वारा उसकी समग्र या आंशिक संपत्ति से वंचित किया जाता है।

(iii) जहां बंधकी के कब्जे के लिए हकदार होने पर बंधककर्त्ता कब्जा परिदान करने में विफल होता है या बंधकी को उसके कब्जे की सुरक्षा करने में असफल होता है।

विक्रय करने का अधिकार

  1. यह अधिकार केवल निम्न से संबंधित हैं -

(1) सादा बंधक।

(2) अंग्रेजी बंधक।

(3) साम्यिक बंधक।

  1. वे कब्जा पाने के लिए वाद नहीं कर सकते। वे केवल विक्रय के लिए वाद कर सकते हैं। यदि न्यायालय भ्रमवश उसको कब्जा देता है तो वह कब्जा मोचन निषेध के समान नहीं होता और बंधककर्त्ता वाद में बंधक को मोचित करा सकता है।