बंधककर्त्ता का व्यवस्था करने का अधिकार - Page 148

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पुरोबंध का अधिकार - यह अधिकार

(i) सशर्त विक्रय द्वारा बंधकी से।

(ii) विलक्षण बंधक से जिसके द्वारा बंधकी के अनुसार वह पुरोबंध से संबंधित है।

बंधकी जो विक्रय के लिए या पुरोबंध के लिए वाद नहीं ला सकते - (1) भोग-बंधकी

(2) रेल, नहर या अन्य संपर्क का बंधकी जिसके रख-रखाव में जनता हितबद्ध है।

बंधककर्त्ता का मामला बंधकी का न्यासी या निष्पादक हो सकता है या बंधकी जो बंधककर्त्ता का न्यासी या निष्पादक हो सकता है।

क्या ऐसा बंधककर्त्ता या बंधकी विक्रय को पुरोबद्ध कर सकता है?

धारा 67 का उपखंड (ख) बंधककर्त्ता जो बंधी के लिए न्यासी हो गया है के मामले का प्रावधान करता है। इस खंड के अनुसार बंधककर्त्ता न्यासी जो विक्रय के लिए दावा ला सकता है, पुरोबंध के लिए अनुमत नहीं है।

अन्य मामले में पुरोबंध इंग्लिश पद्धति के अनुसार इस सिद्धांत पर निषिद्ध है कि बंधककर्त्ता के हितों के संबंध में राय लेना न्यासी का कर्त्तव्य है और यह कि यह बंधककर्त्ता के हित के लिए है कि विक्रय हो न कि पुरोबंध हो।

न्यायालय के हस्तक्षेप के बिना विक्रय की शक्ति का प्रयोग

  1. नियमानुसार बंधकी न्यायालय के द्वारा ही संपत्ति का विक्रय करा सकता है।
  2. धारा 69 इस नियम के अपवाद का प्रावधान करती है।

(i) जहां बंधक एक अंग्रेजी बंधक है और या तो बंधककर्त्ता या बंधकी एक

हिन्दू, मुसलमान या बौद्ध या गजट में अधिसूचित समुदाय का सदस्य है।

(ii) जहां विलेख द्वारा विक्रय की शक्ति स्पष्टतः दी गई है और बंधक पुत्र का

पुत्र है।

(iii) जहां विलेख द्वारा विक्रय की शक्ति स्पष्टतः दी गई है और संपत्ति या उसका

कोई भाग विलेख के निष्पादन के दिनांक को बम्बई आदि नगरों में स्थित

था।

धारा 69 (अ)

  1. बंधकी जिसको न्यायालय के हस्तक्षेप के बिना विक्रय की शक्ति अधिकार से

भिन्न रूप में प्राप्त है उसकी ओर से उनके स्वयं के द्वारा हस्ताक्षर करके आदाता

को नियुक्त करने के लिए भी हकदार है।

  1. इस विक्रय या आदाता नियुक्त करने की शक्ति का प्रयोग बंधककर्त्ता को सूचना

देने पर है।