बंधककर्त्ता का व्यवस्था करने का अधिकार - Page 149

132 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. सूचना लिखित रूप में मूलधन के संदाय की अपेक्षा करते हुए एवं तीन माह तक

के व्यतिक्रम के संबंध में हो।

धारा 73

(I) बंधकी का विक्रय की आय पर अधिकार।

(1) जब संपत्ति राजस्व के या अन्य लोक शुल्क की बकाया के संदाय में व्यतिक्रम

के लिए बेची जाती है और ऐसा व्यतिक्रम बंधकी की चूक के द्वारा नहीं है तो

बंधकी विक्रय धन के शेष का दावा करने के लिए हकदार है। (2) इसी प्रकार यदि बंधक संपत्ति अनिवार्यतः अर्जित की जाती है तो बंधकी बंधककर्त्ता

को क्षतिपूर्ति के रूप में देय धनराशि में से बंधक धन के संदाय का दावा करने

के लिए हकदार है।

(3) उसका दावा पूर्ववर्ती अधिभारों के अतिरिक्त सभी के प्रति अविभावी होगा। (4) यद्यपि बंधक धन देय नहीं हुआ है तो भी दावा प्रवर्तित कराया जा सकता है।

(II) बंधक की निरंतरता की अवधि पर्यंत प्रतिभूति के अक्षत रखने के लिए बंधकी के अधिकार।

(i) प्राप्ति/अभिगम्यता का अधिकार - धारा 70

(ii) पट्टठ्ठा नवीकृत करने का अधिकार - धारा 71

(iii) संपत्ति का परिरक्षण करने का अधकिर - धारा 72

धारा 70

1. प्राप्ति/अभिगम्यता का अधिकार

बंधकी अपनी प्रतिभूति प्रयोजन से अभिगम्यता के लिए हकदार है यदि अनुवृद्धि बंधक के दिनांक के बाद की जाती है।

29 कलकत्ता 803

जहां भूमि पर दो बंधक निष्पादित किए गए हों जिस पर एक घर मकान हो और उसके बाद भूमि पर बंधककर्त्ता द्वारा दो नए मकान बनवाए गए हों, अभिनिर्धारित किया गया कि वे अनुवृद्धि थी जिस पर बंधक प्रतिभूति के लिए विश्वास कर सकता था।

यदि मकान बंधक से पूर्व बनाया गया था तो वह नहीं कर सकता था।

यदि वह डिक्री के बाद बनाया गया था तो यद्यपि वह नहीं कर सकता था धारा ऐसा व्यक्त नहीं करती है।

यह इसके प्रतिकूल संविदा के अधीन है।

धारा 71

2. नवीकृत पट्टठ्ठे के फायदे का अधिकार