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136 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

फ्एक तथ्य प्रमाणित माना जाता है जब इसके सामने सभी विषयों पर विचार करने के बाद न्यायालय उसके विद्यमान होने का विश्वास करता है. . .य्

इसके समक्ष विषयों की अभिव्यक्ति शब्द साक्ष्य के अंतर्गत आने से अधिक विस्तृत है।

साक्ष्य के अंतर्गत नहीं आते हैंः

  1. वादी और प्रतिवादी के द्वारा दिए गए कथन।

  2. गवाहों के आचरण।

  3. स्थानीय निरीक्षणों के परिणाम।

  4. न्यायिक लिखे हुए तथ्य।

  5. कोई यथार्थ और व्यक्तिगत सामान जिसका निरीक्षण विवादित प्रश्न को

निश्चित करने में सारभूत हो सकता है जैसे कि अस्त्र, औजार या चोरी का

माल।

  1. मजिस्ट्रेट द्वारा अभियुक्त से किए गए प्रश्न और उत्तर।

किन्तु ये सभी फ्उसके समक्ष विषयोंय् की अभिव्यक्ति के अंतर्गत हैं।

बात यह है कि साक्ष्य की परिभाषा, साक्ष्य अधिनियम में चल रहे विषयों में पूर्णतः लागू है। यह अन्य अधिनियमों में साक्ष्य के लिए प्रयुक्त नहीं होती।

2. भारतीय साक्ष्य अधिनियम की उत्पत्ति।

  1. भारत में साक्ष्य विधि 1872 के अधिनियम I में समाहित है।

साक्ष्य विधि की विविधता

  1. 1773 में जब ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा उसके भारतीय अधिक्षेत्रों के प्रशासन को

नियंत्रित किए जाने के दृष्टिकोण से ब्रिटिश संसद द्वारा रेग्यूलेटिंग अधिनियम

पारित किया गया था उस समय ब्रिटिश न्यायालयों के दो समूह थे। बम्बई, मद्रास

और कलकत्ता के प्रेसीडेंसी नगरों में राजसी अधिकार-पत्र द्वारा स्थापित उच्चतम

न्यायालय थे। मुफस्सिल्स में ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा सिविल और इंड न्यायालय

बनाए गए। उच्चतम न्यायालयों द्वारा अपनाए जाने वाले साक्ष्य के नियम, मुफस्तिल

न्यायालयों द्वारा अपनाए गए साक्ष्य के नियमों से भिन्न थे।

  1. उच्चतम न्यायालय ऐसे साक्ष्य के नियमों का अनुसरण करतं थे जैसे कि सामान्य

एवं सांविधिक विधियों, जों 1726 से पूर्व इंग्लैंड में प्रचलित थे और जो उसी वर्ष

के अधिकार-पत्र द्वारा भारत में लाए गए थे। भारत के लिए स्पष्टतः विस्तृत संसद

के बाद के अधिनियमों में पाए जाने वाले कुछ अन्य नियम थे, जो प्रचलन एवं

प्रथा से बढ़कर प्रभावशाली नहीं थे।

  1. प्रेसीडेंसी नगरों के अलावा और राजसी अधिपत्र द्वारा प्रस्थापित न्यायालयों के लिए

कोई साक्ष्य के परिपूर्ण नियम कभी निर्धारित या सत्ता द्वारा स्थापित नहीं किए गए।