137
1793 एवं 1884 के बीच बनाए गए विनियमों में थोड़े से नियम शामिल थे। अन्य
एक अस्पष्ट रूढि़गत साक्ष्य विधि से अंशतः हेदया (निदेशों) एवं मुसलमान विधि
अधिकारियों से लिए गए थे। दूसरे इंग्लिश पाठ्य पुस्तकों से लिए गए थे।
एकरूपता की ओर प्रयास
- परिषद में वायसराय (गवर्नर जनरल) का प्रथम अधिनियम जो साक्ष्य से संबंधित
था, सही अर्थ में 1835 का दशम अधिनियम था, जो ब्रिटिश भारत में सभी
न्यायालयों में लागू हुआ और परिषद में वायसराय के अधिनियमों का प्रमाण
था।
इसके पश्चात् अगले बीस वर्षों के समय में ग्यारह अधिनियम पारित किए गए, जिन्होंने साक्ष्य विधि के अनेक छोटे-मोटे संशोधनों को प्रभावित किया और भारत के न्यायालयों में लागू हुए तथा इंग्लैंड साक्ष्य विधि में अनेक सुधार किए गए।
1855 में, साक्ष्य-विधि में और सुधार के लिए 1855 का द्वितीय अधिनियम पारित किया गया, जिसमें ब्रिटिश भारत के सभी न्यायालयों में प्रयोग होने वाली अनेक व्यवस्थाएं थीं।
- फिर भी एकरूपता के इस प्रयास से प्रेसीडेंसी नगरों में और उन मुफस्सिलों में
लागू साक्ष्य के नियमों के बीच अत्यधिक विषमता जारी रही। यह विषमता निरंतर
न्यायिक विवेचनाओं के अधीन बनी रही।
इस अवस्था को ठीक करने के लिए 1872 का प्रथम अधिनियम पारित किया गया।
अधिनियम की संरचना
- एक अधिनियम (1) समेकित करने या (2) संशोधन करने या (3) समेकित
और संशोधित करने वाला हो सकता है या वह परिभाषा करने अर्थात् संहिताबद्ध
करने वाला हो सकता है। अधिनियम की रचना करना, नियम को समेकित करने
और संहिताबद्ध करने से भिन्न होगा।
- एक संहिताबद्ध अधिनियम की संरचना
एक संहिताबद्ध नियम के संबंध में संरचना का नियम, (1891) ए.सी. 107 (120) में निर्धारित किया गया है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड बनाम वैगलियानो
लॉर्ड हॉल्सबरी का कथन हैः
(पृष्ठ 120)
फ्मैं इस दृष्टिकोण को अपनाने के लिए पूर्णतः अक्षम हूं कि जहां एक संविधि स्पष्टतः कानून को संहिताबद्ध करने वाली कही जाती है, आप इस प्रकार संरचित, संहिता के बाहर जाने के लिए स्वतंत्र हैं, क्योंकि उस संहिता के अस्तित्व से पहले एक