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अधिनियम का क्षेत्र और विस्तार

(1) अधिनियम का क्षेत्र धारा 2 में परिभाषित है। धारा 2 के अंतर्गत साक्ष्य विधि में हैः

(i) साक्ष्य अधिनियम में तथा

(ii) अन्य अधिनियमों या संविधियों में जो साक्ष्य के विषयों पर प्रावधान करते

हैं और जो स्पष्टतः निरस्त नहीं किए गए हैं।

यह धारा अपने प्रभाव में किसी भी नियम, अधिनियम या विनियम जो निरस्त नहीं हुई है के अंतर्गत किसी प्रकार के साक्ष्य को निषिद्ध करती है।

धारा 2ः- निम्नलिखित विधियां निरस्त हो जाएंगीः

  1. साक्ष्य के वे सभी नियम जो किसी संविधि अधिनियम या विनियम में अंतर्विष्ट नहीं है।

  2. भारतीय परिषद् अधिनियम, 1861 की धारा 25 के अंतर्गत विधि को शक्ति प्राप्त किए हुए विनियम में समेकित सभी ऐसे नियम।

  3. अनुसूची में उल्लिखित अधिनियमन।

(2) साक्ष्य से संबंधित साक्ष्य अधिनियम और अन्य अधिनियम

  1. साक्ष्य अधिनियम, विधि को एक महत्त्वपूर्ण शाखा के साथ बरतने वाला एक पृथक

विधान है और इसके उपबंध दंड प्रक्रिया संहिता में समाहित प्रक्रिया के नियमों

से स्वतंत्र हैं और जब तक यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित नहीं किया जाता है कि वे

एक अन्य संविधि के द्वारा निरस्त या परिवर्तित नहीं किए गए उनका कार्य क्षेत्र

पूर्ण रूप से कायम है।

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अधिनियम की प्रयुक्ति

धारा 1 अधिनियम की प्रयुक्ति निर्धारित करती है

(1) राज्य क्षेत्रीय प्रयुक्ति

यह संपूर्ण ब्रिटिश भारत के लिए लागू होता है और इसलिए अनुसूचित जनपदों में भी लागू होता है। यह उन स्थानों तक लागू है जहां इसका लागू होना घोषित किया गया है।

  1. न्यायाधिकरणों के लिए प्रयुक्ति

यह किसी भी न्यायालय में या उसके समक्ष सभी न्यायिक कार्यवाहियों में लागू होता है।

(i) एक न्यायिक कार्यवाही का क्या तात्पर्य है? इसकी कोई परिभाषा नहीं है।

एक (जांच) न्यायिक है यदि उसका उद्देश्य, एक व्यक्ति और दूसरे व्यक्तियों के या व्यक्तियों के एक समूह के मध्य या उसके एवं सामान्यतः समुदाय के मध्य न्यायिक