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संबंध को निर्धारित करना है, किन्तु एक जज कभी भी एक उद्देश्य के दृष्टिकोण के बिना कार्य न्यायिक कार्यवाही नहीं करता है।

12 बम्बई 10 एम.आई.ए. 340

बम्बई भू राजस्व संहिता की धारा 32 के अंतर्गत एक (जांच) एक न्यायिक कार्यवाही नहीं है।

22 बम्बई, 936 2. अधिनियम सभी न्यायिक कार्यवाहियों के लिए लागू होता है जैसे सिविल तथा

फौजदारी अदालतों में।

  1. अधिनियम केवल मुकदमे एवं जांच की कार्यवाहियों की बात नहीं करता है।

कार्यवाहियां एक व्यापक शब्द है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 107 या 144 के

अंतर्गत जांच एक परीक्षण नहीं है किन्तु यह एक कार्यवाही है। इसी प्रकार एक

डिक्री का निष्पादन एक मुकदमा नहीं किन्तु एक कार्यवाही है। फलतः, अधिनियम

परीक्षणों एवं मुकदमों के अतिरिक्त अन्य कार्यवाहियों पर लागू होता है।

(ii) एक न्यायालय क्या है?

  1. धारा 3 जो एक व्याख्या खंड है उस अभिप्राय का उल्लेख करता है जिसमें शब्द ‘न्यायालय’ अधिनियम के रूप में प्रयोग किया जाता है। इस धारा के अनुसार -

फ्न्यायालय शब्द के अंतर्गत सभी न्यायाधीश एवं दंडाधिकारी, मध्यस्थों के अतिरिक्त, साक्ष्य लेने के लिए कानूनन प्राधिकृत सभी व्यक्ति आते हैं।य्

  1. यह धारा, फ्न्यायालय क्या है?य् को परिभाषित नहीं करती यह मात्र व्यक्त करती है कि न्यायालय शब्द के अंतर्गत क्या है अर्थात् कौन से अधिकारी एक न्यायालय के रूप में माने जाते हैं।

  2. जहां एक व्याख्या खंड में एक शब्द में यह एवं वह को उल्लिखित किया जाता

है, इसका अभिप्राय है कि शब्द अपने साधारण अर्थ को सुरक्षित रखता है और

खंड शब्द के अभिप्राय को फैलाता है और विषयों को एकत्र करता है जिनमें

साधारण अर्थ को अलग रखा जाता है।

23 ए.एल.जे. 845 4. न्यायालय से तात्पर्य है कि मध्यस्थों के अतिरिक्त सभी व्यक्ति, जो साक्ष्य

लेने के लिए कानूनन प्राधिकृत हैं। इसलिए यह शब्द न्यायालय अर्थात् एक

दीवानी न्यायालय या एक फौजदारी न्यायालय में पीठासीन व्यक्तियों तक परिसीमित

होने वाला नहीं है।

पंजीकरण अधिनियम के अंतर्गत जांच करने एवं साक्ष्य लेने वाला एक रजिस्ट्रार, एक न्यायालय है।

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