भाग -3 प्रमाण का भार - Page 161

भाग - एक

प्रमाण का भार

(1) प्रमाण का भार का क्या अर्थ है?

विवरण लेख (पत्र) फिर परिभाषा

न्यायाधीश अथवा ज्यूरी किसी मामले को केवल पक्षों के द्वारा आरोपित एवं प्रमाणित तथ्यों की सत्यता एवं गुणवत्ता के संबंध में विचार करने पर निर्णीत करते हैं क्योंकि दोनों को साक्ष्य ज्ञात नहीं होते। वे निश्चित साक्ष्य द्वारा निर्धारित किए जाने चाहिए। तुरंत यह प्रश्न उठता है कि कौन-सा पक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करे? ऐसे साक्ष्य को जो किसी आरोप को स्थापित करेगा, प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी ‘प्रमाण का भार’ कहलाती है।

  1. न्यायिक कार्यवाहियों में प्रयुक्त प्रमाण की विषय वस्तु के दो भाग होते हैंः

(1) एक विवाद्यक विषय को प्रमाणित करने का भार

(2) एक विशेष तथ्य को प्रमाणित करने का भार

इस विभाजन को करने की आवश्यकता

  1. एक विवाद्यक विषय का प्रमाण (सबूत) अनेक तथ्यों के प्रमाण शामिल कर सकता है। जैसे कि वे केवल एक तथ्य के प्रमाण को शामिल कर सकते हैं।

दृष्टांत

  1. विवाद्यक-विषय है, क्या अ ने ब की हत्या की?

  2. विवाद्यक-विषय है, क्या दस्तावेज पर हस्ताक्षर उस अ के हैं?

विवाद्यक विषय है संख्या 2 मात्र एक तथ्य के प्रमाण को शामिल करता है। विवाद्यक-विषय संख्या 1 अनेक तथ्यों के प्रमाण को शामिल कर सकता है।

उदाहरणतः क्या अ उपस्थित था?

क्या स ने उसको देखा?

क्या खून से सनी कमीज उसकी ही है? आदि-आदि।