भाग -3 प्रमाण का भार - Page 163

146 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

जो संभवतः किया जा सकता है, वह कल्पित घटना की असंभवता होगी और इसे भी बहुत बड़ी संख्या में अनुमानित साक्ष्य की जरूरत होगी।

एक नकारात्मक प्रकथन एक सकारात्मक प्रकथन खंडन से निश्चित प्रभेदित होना चाहिए जो ‘तकनीकी रूप’ से प्रत्याख्यान के रूप में जाना जाता है।

दृष्टांत

दोषपूर्ण अभियोजन

दोषपूर्ण अभियोजन के लिए एक मामले में वादी दो मुख्य आरोप लगाता हैः-

(1) यह कि प्रतिवादी ने उसको अभियोजित किया।

(2) यह कि प्रतिवादी के पास अभियोजन के लिए कोई युक्तियुक्त कारण नहीं था।

प्रथम स्वीकारात्मक होते हुए दूसरा एक नकारात्मक प्रकथन है। दोनों का प्रमाण-भार वादी पर है।

असावधानी

प्रतिवादी ने यथोचित और उपयुक्त सावधानी नहीं बरती।

यह नकारात्मक नहीं वरन् नकारात्मक प्रकथन है।

  1. साक्ष्य के नियम के संबंध में दो बातें अवश्य ध्यान में रखनी चाहिए कि एक प्रस्ताव स्वीकारात्मक अवश्य सिद्ध होना चाहिए।

12 मद्रास 526-15 जे.यू.आर. (जूर. 544-545)

प्रत्याख्यान क्या है?

  1. यह एक विषय है जो (वकालत) की विधि से संबंधित है। न्यायाधीश से किसी प्रश्न को जो वादकारियों के मध्य विवाद में है को निर्णीत करने को निवेदन किया जाता है, यह सभी वादों में वांछनीय और सर्वाधिक वादों में आवश्यक है, कि उनके लिए प्रस्तुत किया गया विषय स्पष्टतः सुनिश्चित होना चाहिए। प्रतिवादी यह जानने के लिए अधिकृत है, यह क्या है कि जिसे वादी उसके विरुद्ध आरोपित करता है, वादी अपने बारे में जानने को अधिकृत है कि उसके दावे के प्रत्युत्तर में जो प्रतिवाद किया जाएगा। प्रतिवादी द्वारा किए गए प्रत्येक वक्तव्य पर विवाद कर सकता है या वह स्वीकार कर सकता है या अन्य तथ्यों को जो मामले में एक भिन्न जटिलता रखते हैं, को स्वीकृत एवं आरोपित कर सकता है।

इसे तकनीकी रूप में प्रस्तुत के लिए एक प्रतिवादी या तोः

(1) स्वीकृत