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(2) अस्वीकृत
(3) अस्वीकृत एवं अन्य तथ्यों को आरोपित कर सकता है।
- जब एक प्रतिवादी अदालती दावे में वादी के आरोप को अस्वीकार करता है वह उसका प्रत्याख्यान करने वाला कहा जाता है। एक प्रत्याख्यान एक प्रतिवादी की वकालत में एक तथ्य के एक आरोप का स्पष्ट प्रतिवाद है। यह सामान्यतः आरोप का ठीक शब्दों में एक खंडन है। यह नकारात्मक सांचे में बनाया गया एक नियम है, क्योंकि वह तथ्य जिसको यह अस्वीकार करता है, नियम के रूप में सकारात्मक है। यह प्रत्याख्यान सकारात्मक आरोपों के एक नकारात्मक आरोप, जो सत्यतः एक सकारात्मक आरोप है से निश्चित रूप से भिन्न होना चाहिए।
यदि एक पक्ष सकारात्मक दावे के साथ कहता है, और यह उसके द्वारा उसके मामले के लिए सिद्ध करना आवश्यक हो जाता है कि तथ्यों की एक निश्चित दशा विद्यमान (अस्तित्व में) नहीं है, या कि एक विशेष बात एक विशेष प्रयोजन के लिए अपर्याप्त है_ और इसी प्रकार से - ये यद्यपि वे नकारात्मक के समान है - वास्तव में नकारात्मक नहीं हैः वे सत्यतः संभव प्रकथन है, और वह पक्ष जो उन्हें कहता है उनको प्रमाणित करने को बाध्य हैं।
वादी को अपने सकारात्मक दावे को सिद्ध करने के लिए नकारात्मक दावे को सिद्ध करना है।
एक नकारात्मक प्रकथन यदि सत्य है तो वह एक सकारात्मक प्रकथन है और वह वादी के द्वारा निश्चिततः सिद्ध होना चाहिए।
विक्रय एवं बंधक - मूल्य की उपयुक्तता। मूल्य अपर्याप्त नहीं है?
- याद रखना है कि विवाद्यक-विषय के सकारात्मक एवं नकारात्मक का तत्त्व के रूप में और न कि मात्र उसके सकारात्मक नकारात्मक रूप में।
दृष्टांत
(1) मूडी एवं रॉबिन्सन 464 अमास बनाम हग्स।
अदालती दावे में आरोपित तथ्य
यह कि प्रतिवादी ने एक अलंकृत ढंग से केलिको प्रस्तुत नहीं किया।
लिखित कथन में आरोपित तथ्य
प्रतिवादी ने एक शिल्पी के ढंग से केलिको को उत्कीर्ण किया। भार किस पर है? यदि रूप को अकेले विचारित किया था तो भार प्रतिवादी पर होता। यदि वास्तविकता पर विचार किया गया था तो भार निश्चित रूप से वादी पर होना चाहिए। यद्यपि नकारात्मक में रखा गया तो वह प्रतिज्ञान करता है कि शिल्पी ने अशिल्पी के ढंग से केलिको को