148 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
उत्कीर्ण किया।
(2) 7 केरिंगिटन एवं पायने 612 लोवार्ड बनाम लेग्गट
वादी द्वारा आरोपित तथ्य
यह कि प्रतिवादी ने परिसर की मरम्मत नहीं की जैसा कि वह प्रसंविदा द्वारा बाध्य था।
प्रतिवादी द्वारा आरोपित तथ्य।
प्रतिवादी ने मरम्मत की थी।
रूप में भार प्रतिवादी पर है।
वास्तविकता में यह वादी पर है।
फौजदारी मुकदमे में विवाद्यक-विषय को सिद्ध करने का भार।
- धारा 101 एक सामान्य धारा है और दीवानी और फौजदारी दोनों कार्यवाहियों में
प्रयुक्त होती है।
धारा 105 एक अन्य धारा है जो एक विवाद्यक विषय को सिद्ध करने से संबंधित है, तो तथ्य को सिद्ध करने से अलग है किन्तु केवल फौजदारी कार्यवाहियों के लिए ही प्रयुक्त होती है।
- इस धारा को समझने के लिए भारतीय दंड संहिता की रूपरेखा को जान लेना
आवश्यक है। भारतीय दंड संहिता बहुत से अपराधों को परिभाषित करती है जैसे
कि चोरी, हत्या, ठगी आदि। कोई 400 सब मिलाकर। परिभाषा करने का कार्य
जो सही हो न तो बहुत विस्तृत हो न बहुत संकीर्ण, बहुत कठिन है और सर्वोत्तम
उपाय करने के बाद भी संहिता के रचयिता सच्ची परिभाषा करने में असफल हुए
हैं। तथापि वे उनको बहुत विस्तृत बनाने में गलती कर गए हैं। फलतः अपवादों
के अधिनियम के द्वारा इन परिभाषाओं को सीमित करना उन्होंने आवश्यक पाया।
इन अपवादों में से कुछ जैसा कि संहिता द्वारा परिभाषित हैं, सभी अपराधों के
लिए सामान्य हैं। अन्य अपवाद एक विशेष अपराध के लिए उपयुक्त हैं।
दृष्टांत (1)ः
(1) जो कोई चोट करता है ......................... 323
(2) जो कोई चोरी करता है ........................ 379
जो कोई = कोई व्यक्ति जो करता है आदि।
कोई व्यक्ति = धारा में दी गई परिभाषा के अनुसार कोई भी व्यक्ति यहां तक कि एक वर्ष के बच्चे को भी अपराधी बना देगी। किन्तु दंड संहिता यह मान्य करती है