भाग -3 प्रमाण का भार - Page 166

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कि 7 वर्ष के बच्चे में मेन्सरिया = अपराधी चित्त, जो अपराध का सार है, नहीं होता। एक बच्चे को एक अपराध के दायित्व से मुक्त करने के लिए, भारतीय दंड संहिता को प्रत्येक धारा में, जो कोई 7 वर्ष से ऊपर आदि कहना आवश्यक होगा।

(1) जो कोई एक अन्य से संबंधित किसी संपत्ति को उसके कब्जे से बिना उसकी

सम्मति के लेता है ................. 378

(2) जो कोई दोष वह अनुचित रीति से बंदी बनाता है - 342

(3) जो कोई एक अन्य व्यक्ति के अधिकार की संपत्ति में दखल करता है

.................... 44

(4) जो कोई आक्रमण करता है या आपराधिक बल प्रयोग करता है ................

352

यह स्पष्ट है कि इन परिभाषाओं के अंतर्गत एक कारिन्दा जो उगाही करने में अपने अधिकारियों के आदेश के अनुसार जो कार्य करेगा वह धारा 378 के अनुसार चोरी का तथा धारा 441 के अनुसार अनधिकृत प्रवेश का दोषी होगा। इसी प्रकार एक पुलिस अधिकारी जिसने अपनी ड्यूटी के निर्वहन में किसी व्यक्ति को गिरफतार किया है, हमले/353 और गलत कारावास/342 का दोषी होगा।

दंड संहिता के रचयिताओं का अभिप्राय वह नहीं था। यह लोक सेवकों को उनके कर्त्तव्य के पालन में उनके किए हुए कार्यों के दांडिक परिणामों से मुक्त करने की आवश्यकता को मान्यता देती है। अपराधों की परिभाषाओं के क्षेत्र से लोक सेवकों को मुक्त करने के लिए, इन धाराओं में से हर एक में यह कहना आवश्यक होता, फ्जो कोई अपने कर्त्तव्य के पालन में लोक सेवक न हो।य् इतनी सारी धाराओं में, जिनके लिए वे सामान्य हैं, इन सीमित करने वाले शब्दों को दोहराने के स्थान पर दंड संहिता ने उनको एक साथ परिच्छेद चार में समूहबद्ध कर दिया है, जो सामान्य अपवाद कहलाते हैं और जो धारा 76 से 106 तक को समाविष्ट करते हैं।

यहां कुछ सीमित उपबंध भी हैं जो कुछ विशिष्ट अपराधों के लिए प्रयुक्त होते हैं और वह दंड संहिता में परिभाषित हैं।

दृष्टांत

धारा 499 मानहानि

परिभाषा इतनी विस्तृत है कि उसमें अपवाद हैं।

नए अपवाद की आवश्यकता - हित का संरक्षण।

ऐसे अपवाद जो सामान्य अपवादों से अलग है।