भाग -3 प्रमाण का भार - Page 167

150 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

परंतुक (प्रतिबंध)

दृष्टांत - धारा 92 भा.दं.सं.

प्रश्न है कि किसको सिद्ध करना चाहिए कि अभियुक्त का मामला सामान्य या विशेष अपवाद में आता है, अपवाद या प्रतिबंध का मामला हो सकता है, अभियोग पक्ष जो आरोपित करता है कि वह नहीं आता या अभियुक्त पक्ष आरोपित करता है कि यह आता है? उत्तर धारा 105 में दिया गया है। सिद्ध करने का भार अभियुक्त पर है।

यह पूर्ववर्ती विधि से प्रत्यंतर है। उसके अंतर्गत भार अभियोग पक्ष पर है यह साबित करने का कि मामला अपवाद के अंतर्गत नहीं आता था।

दीवानी (सिविल) विधि में एक अपवाद के प्रमाण का भार

  1. साक्ष्य अधिनियम में कोई विशिष्ट धारा नहीं है जो सिविल कानून में एक अपवाद के संबंध में प्रमाण को विनियमित करती हो। तथापि नियम वही है जैसा दण्ड-विधि में है। अर्थात् प्रतिवादी अवश्य सिद्ध करे कि मामला अपवाद के अंतर्गत आता है।

दृष्टांत 15 कलकत्ता 555

फ्मामला 1859 के एकादश बंगाल अधिनियम (राजस्व विक्रय अधिनियम) की धारा 37 से विनियमित हैं - और वह धारा भारग्रस्तता एवं समय काल के साथ कार्य करते हुए निर्धारित करती है कि नीलामी को लेने वाला तभी अधोधारणाधिकारों से बचने और कतिपय अपवादों के साथ उनके धारकों को बेदखल करने के लिए अधिकृत होगा, और तब अपवादों को नियत करने को आगे बढ़ती है। हमें यह प्रकट होता है कि अनुमान विधि के सामान्य प्रस्ताव को निर्धारित करने के पक्ष में है कि सभी अधोधारणाधिकार व्यर्थनीय है, और एक निश्चित अपवाद की वकालत उसको इसके अंतर्गत लाने के लिए बाध्य है। इसे ऐसा होने पर इस मामले में अपवाद जिसकी वह वकालत करता है, के अंतर्गत स्वयं को लाने के लिए प्रतिवादी के लिए ही होगा।

एक अपवाद, एक प्रतिबंध या एक समझौते में पूर्ववर्ती दशा को प्रमाणित करने का भार

1. प्रतिबंध और एक अपवाद में भिन्नता

एक प्रतिबंध उपयुक्तः कहा जाए एक प्रतिज्ञापत्र की विषय वस्तु के किसी बाह्य वस्तु का कथन है जो प्रतिज्ञा पत्र की प्रतिबंधिताओं के द्वारा विकलीकरण की युक्ति से उस प्रतिज्ञा पत्र को बर्खास्त करता है। एक अपवाद प्रतिज्ञा पत्र की विषय वस्तु के किसी भाग को उससे बाहर निकालना है।

यदि एक प्रतिबंध या अपवाद से विशेष शब्द, यथार्थ रूप जिसमें वे प्रस्तुत किए जाते हैं या एक विलेख के भाग जिसमें वे पाए जाते हैं, पर इसी प्रकार निर्भर नहीं करेंगे।