151
- वकालत का नियम है कि वादी का अपने वादपत्र में प्रतिबंध करने की कभी कोई आवश्यकता नहीं है, किन्तु वह हमेशा एक अपवाद को अवश्य व्यक्त करे।
आगा सैयद सादुक बनाम रजो मुहम्मद जकरिया
2 इण्ड. जर. अन. एस. 308 (310)
310 मार्कबाई जे.
थर्सबाई बनाम प्लांट 1 डब्ल्यू.एम.एस. सोंड पृ. 2336 की टिप्पणी में यह निर्धारित किया गया है कि एक प्रतिबंध विफलीकरण की युक्ति से एक प्रतिज्ञापत्र की एक विषय-वस्तु के बाह्य किसी वस्तु का उपयुक्ता विषय है। एक अपवाद प्रतिज्ञापत्र में से उसकी विषय-वस्तु के किसी भाग को लेना है। ये सही परिभाषाएं होने पर एक वादी को कभी भी एक प्रतिज्ञापत्र को व्यक्त करने की कोई आवश्यकता नहीं है, किन्तु वह एक अपवाद को हमेशा व्यक्त करे।
- यद्यपि यह एक वकालत के नियम के रूप में निर्धारित किया गया है, यह प्रमाण के भार के नियम के रूप में भी भली-भांति धारित किया गया है। इसलिए यदि एक खंड (वाक्यांश) एक प्रपत्र में जैसे कि बीमा पॉलिसी एक अपवाद होता है, वादी उसको अवश्य व्यक्त करे, किन्तु दर्शाए कि यह लागू नहीं है। यदि वह एक प्रतिज्ञा पत्र हो तो प्रतिवादी उसे अवश्य व्यक्त करे, और दर्शाए कि वह लागू होता है।
2 इण्ड.ज.एन.एस. 308, 310
2 इण्ड.ज.एन.एस. 308-1867
अ ने 24 नवम्बर, 1865 के दोपहर से 24 फरवरी 1866 के दोपहर तक और सभी बंदरगाहों और स्थानों के लिए फ्अलायाय् जलपोत पर एक बीमा पॉलिसी पर बी एण्ड क. पर दावा किया। शब्द फ्सभी बंदरगाहों और स्थानोंय् लिखे थे, शेष मुद्रित थे। बी एण्ड कं. ने अपने प्रतिवाद पत्र (लिखित कथन) में बीमा पॉलिसी को स्वीकार किया किन्तु निम्नलिखित अपवाद को लगाया फ्सभी अवरोधन आदि से उत्पन्न होने वाली जोखिम या हानि या, वायु के झंझावत तूफानों या समुद्र के अन्य संकटों से भी जबकि पाइंट पालमिरास से सीलोन (श्रीलंका) और परिवेश के अंतर्गत कोरामण्डल के तट पर स्पर्श या व्यापार करते हुए 15 अक्टूबर एवं 15 दिसम्बर के मध्य एतद् द्वारा स्वीकृत की जाती हैं, जिनके दायित्व या हानि या बीमा कंपनी द्वारा न कि बीमाकर्त्ताओं के द्वारा, वहन की जानी है। यद्यपि इससे पूर्व कोई बात विरोध में उत्पन्न हो।
3. एकिक्स
4. पूर्ववर्ती प्रतिबंधिता = प्रतिबंधक
इस संबंध में साक्ष्य विधि ने तीन सिद्धांत बनाए हैं।